विकास का बजट लाने को तैयार हरियाणा की खट्टर सरकार के सामने इस बार का बजट किसी चुनौती से कम नहीं है। जाट आरक्षण आंदोलन की मार से धीरे-धीरे उबर रहे प्रदेश को टैक्स फ्री बजट पेश करना सबसे बड़ी चुनौती है।
बिजली कंपनियों का 25 हजार करोड़ का कर्जा उतारने का दावा कर चुकी सरकार यह पैसा कहां से लाएगी यह दूसरी बड़ी चुनौती है। जबकि हैपनिंग हरियाणा में पांच लाख 84 हजार करोड़ के निवेश के एमओयू साइन करने के बाद टकटकी लगाए बैठे उद्योगों को वित्त मंत्री क्या राहत देंगे यह तीसरी बड़ी चुनौती है।
इन सभी चुनौतियों के बीच सरकार को जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान प्रदेश में हुआ हजारो करोड़ का नुकसान भी सामने दिख रहा है। बहरहाल वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के लिए यह बजट पिछले बजट से ज्यादा चुनौती पूर्ण रहेगा। पिछले बजट में तो सरकार श्वेत पत्र लाकर अपने बचाव का रास्ता तैयार कर गई थी, लेकिन इस बार के बजट में प्रदेश की जनता को सूबे की भाजपा सरकार से खासी उम्मीदे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि व कर्मचारियों के वेतन समेत उन्य कई चुनौतियां वित्त मंत्री के सामने हैं।
सामाजिक योजनाओं के कारण हरियाणा में पिछले कई वर्षों से लगातार घाटे का बजट पेश हो रहा है। वर्ष 2013 में तत्कालीन सरकार ने 2443.23 करोड़ के राजस्व घाटे तथा वर्ष 2014 में 5012.57 करोड़ रुपये के घाटे वाला बजट पेश किया था।
वर्ष 2015 में 9557 करोड़ रुपये के घाटे वाला बजट पेश किया गया था। सूत्रों के मुताबिक इस बार भी बजट तो घाटे वाला होगा लेकिन वर्तमान हालातों को देखते हुए सरकार प्रदेश वासियों पर किसी तरह का अतिरिक्त कर लगाने के मूड में नहीं है।