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Haryana: हरियाणा सरकार ने बागवानी विभाग के निदेशक को हटाया, आईएएस को सौंपा चार्ज

Fri, 19 Jan 2024 12:13 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) की अनुदान राशि के घोटाले में हरियाणा सरकार ने बागवानी विभाग के निदेशक को हटा दिया है। सरकार मामले की सीबीआई जांच के लिए अपनी अनुमति भी एक दो दिन में दे देगी।  
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हरियाणा सीएम मनोहर लाल। - फोटो : @mlkhattar
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विस्तार
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हरियाणा सरकार ने बागवानी विभाग के निदेशक अर्जुन सिंह सैनी से चार्ज लेकर कृषि विभाग के निदेशक राजनारायण कौशिक को सौंप दिया है। सरकार ने सैनी से उस समय चार्ज वापस लिया है, जब फार्मर प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) की अनुदान राशि के घोटाले में केंद्र सरकार की ओर से सीबीआई जांच के लिए राज्य सरकार से सहमति से मांगी है। वहीं, सूत्रों का यह भी कहना है कि सैनी का निदेशक के पद के तौर पर कार्यकाल को पूरे तीन साल हो चुके हैं। 

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नियमों के मुताबिक गैर आईएएस वाले पदों पर विभागाध्यक्ष की नियुक्ति सिर्फ तीन साल की जाती है। फिलहाल सैनी को बागवानी विभाग में ही एचओडी स्पेशल के पद नियुक्ति की गई है। उल्लेखनीय है कि बागवानी विभाग में एफपीओ की अनुदान राशि का घोटाला सामने आया था। इसमें कुछ फर्मों ने खेल कर किसानों के नाम पर लाखों रुपये की अनुदान राशि मंजूर करवा ली थी लेकिन यह राशि किसानों तक नहीं पहुंची थी। जब यह मामला सरकार के पास पहुंचा तो इस मामले की सीआईडी जांच करवाई गई, जिसमें सीएम ने बागवानी विभाग के 10 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की थी। 

विभाग के चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया था और कुछ अफसरों को चार्जशीट भी किया गया था। वहीं, अब केंद्र सरकार ने इस मामले की सीबीआई जांच करवा चाहती है। इसके लिए उसने हरियाणा सरकार से सहमति मांगी थी। बताया जा रहा है कि हरियाणा सरकार अगले हफ्ते इस पर कोई फैसला ले सकता है। अगर इस मामले की सीबीआई जांच होती है तो कई अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।

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बिना सरकार के घोटाला संभव नहीं: दीपेंद्र हुड्डा

इस मामले में दीपेंद्र हुड्डा ने सरकार पर निशाना साधा है। हुड्डा का कहना है कि केंद्र सरकार इस मामले की जांच करना चाहती है, इसका मतलब है कि उसे हरियाणा सरकार पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो सैकड़ों करोड़ के इस घोटाले के तार दूर-दूर तक मिलेंगे। क्योंकि, बिना ऊपर के संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। सरकारी संरक्षण में विभाग के अफसर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी योजना का करोड़ों रुपये धांधली करके डकार गए। प्रदेश सरकार ने अपनी कथित जांच में लीपापोती कर घोटालेबाजों को बचाने का काम किया है। 

उन्होंने कहा कि भाजपा-जजपा सरकार दर्जनों घपले-घोटालों में घिरी हुई है। अवैध खनन घोटाला, धान घोटाला, शराब घोटाला, भर्ती घोटाला, नोट फॉर जॉब घोटाला, जीएसटी चोरी घोटाला, परिवहन विभाग का किलोमीटर स्कीम घोटाला, बिजली विभाग में मीटर खरीद घोटाला, हजारों करोड़ रुपये की काली कमाई वाला ओवरलोडिंग घोटाला, रोडवेज भर्ती घोटाला, नायब तहसीलदार भर्ती (पेपर लीक) घोटाला, इंस्पेक्टर भर्ती (पेपर लीक) घोटाला, आदि इस सरकार की नाक के नीचे हुए प्रमुख घोटाले हैं। सभी मामलों में कहीं न कहीं सरकार में उच्च स्तर पर बैठे लोगों की मिलीभगत रही है। आज तक इस सरकार ने किसी घोटाले की जांच और कार्रवाई को ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचने दिया।
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