हरियाणा सरकार हड़ताल पर बैठे रोडवेज कर्मियों के आगे झुकने को तैयार नहीं है। तभी तो एक ऐसा तीर छोड़ दिया है, जो कइयों से उनकी रोजी रोटी उनकी नौकरी छीन लेगा। रोडवेज की हड़ताल 11 दिन चलने के बावजूद सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत बसें लाने के निर्णय पर कायम है।
राजनीतिक तौर पर दो वार्ताएं सरकार की ओर से कर्मचारियों के साथ की गईं, दोनों ही विफल रहीं, अब सरकार ज्यादा झुकने के बजाए कूटनीतिक तरीके से कर्मचारियों की हड़ताल को बेअसर करेगी। सरकार ने डिपो में खड़ी सभी बसें चलाने का प्लान तैयार कर लिया है। आउटसोर्सिंग पर चौदह सौ ड्राइवर-कंडक्टर भर्ती कर और डिपो स्तर पर दिहाड़ी के हिसाब से भी नियुक्तियां कर जल्दी ही बसों को सड़कों पर उतारेगी।
सरकार का मुख्य फोकस अभी हरियाणा और दिल्ली-चंडीगढ़ के बीच बस सेवा सुचारु करनी है। सभी 3900 बसों को एक बार सड़क पर उतारने के बाद लंबे रूट की सेवाएं बहाल की जाएंगी। लंबे रूट पर सरकार प्रोबेशन पर कार्यरत पक्के ड्राइवर-कंडक्टरों को भेजने की तैयारी कर रही है। इन्हें पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लंबे रूट पर सेवा देने का अनुभव हो चुका है। नए नियुक्त कर्मचारियों और अन्य विभागों लिए गए ड्राइवरों को लंबे रूट पर नहीं भेजा जाएगा।
सरकार ने साफ कर दिए अपने इरादे
हरियाणा रोडवेज बस
- फोटो : file photo
हड़ताली कर्मचारियों को सरकार साफ कर चुकी है कि जिन 510 बसों को लाने का टेंडर और एग्रीमेंट हो चुका है, उन्हें लाने से रोकने का सवाल ही नहीं उठता। जिन 190 बसों का टेंडर होना है, सरकार उस पर ही पुनर्विचार कर सकती है। हड़ताल के लंबा खिंचने से अंदरखाने कर्मचारी भी आजिज आ चुके हैं। कर्मचारियों को सीएम मनोहर लाल की पहल का इंतजार है। चूंकि, सरकार ने अगर सारी चार हजार बसों को सड़कों पर उतार दिया तो कर्मचारियों की हड़ताल नाममात्र की ही रह जाएगी।
शुक्रवार को सड़कों पर दौड़ी 2165 बसें: धनपत सिंह
एसीएस परिवहन धनपत सिंह ने कहा कि रोडवेज की सभी बसों को धीरे-धीरे सड़कों पर उतारने की तैयारी चल रही है। शुक्रवार को 2165 रोडवेज, निजी व सहकारी बसें सड़कों पर उतरीं। 905 परिचालकों की भर्ती आउटसोर्सिंग से करने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही इन परिचालकों को नियुक्ति पत्र देकर बसों पर चढ़ाया जाएगा।