हरियाणा सरकार की ओर से बीफ को बैन करने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका के जरिये चुनौती दी गई है। याची की दलील है कि संविधान के अनुरूप देश में सभी को पसंद का भोजन करने की आजादी है। हाईकोर्ट ने मामले में हरियाणा सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इसके साथ ही इस याचिका को भी पहले से लंबित एक अन्य याचिका के साथ सुनने का निर्णय लिया है, जिसमें गो तस्करी पर रोक लगाने की अपील की गई है। केस की सुनवाई के दौरान याची ने कहा कि बीफ बैन का फरमान मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे में हरियाणा सरकार के इस अधिनियम को खारिज किया जाना चाहिए। याची ने बीफ को गरीबों के लिए एक पौष्टिक करार दिया।
सरकार इस पर रोक लगाकर जहां गरीबों के निवाला छीन रही है, वहीं इससे चमड़े का कारोबार भी प्रभावित होगा। याची ने कहा कि वो खुद गाय की इज्जत करता है, लेकिन गोवंश को खाने पर रोक नहीं लगनी चाहिए। दिल्ली निवासी सीआर जया सुकिन ने कहा कि हरियाणा सरकार ने 16 मार्च 2015 को काऊ प्रोटेक्शन एंड काऊ कंजरवेशन तथा डेवलपमेंट एक्ट 2015 लागू किया था।
इस अधिनियम के तहत बीफ को बेचना और इसका इस्तेमाल करना प्रतिबंधित हो गया है। इस प्रतिबंध के चलते राज्य में कई लोग बेरोजगार हो गए हैं। 5 हजार करोड़ का व्यापार ठप हो गया है। यदि कोई व्यक्ति बीफ का सेवन करना चाहता है तो उस पर प्रतिबंध लगाना मौलिक अधिकारों का हनन है, जिसकी व्याख्या अनुच्छेद 21 में है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की है कि एक्ट को खारिज किया जाए और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की जाए।