कैथल मंडी के आढ़ती कृष्ण कुमार ने बताया कि मंडी में इस समय पीआर धान की आवक शुरू हो गई है। अभी इसमें नमी की मात्रा 26 प्रतिशत तक है। नियमानुसार 17 प्रतिशत नमी तक के ही धान की खरीद सरकारी स्तर पर होगी। सर छोटू राम भारतीय किसान यूनियन में किसान नेता जगदीश ओलख ने कहा कि 20 सितंबर से अनुमति मिल जाती है तो बड़ी राहत मिलेगी। दो साल पहले जरूर 25 सितंबर से खरीद शुरू की थी। जब एक अक्तूबर से खरीद का नियम बना था, उस समय धान देरी से पकता था। अब कम अवधि में पकने वाली किस्में आ गई हैं। जिन्हें 15 सितंबर तक काटना ही पड़ता है।
अनुमति मिलते ही खरीद शुरू की जाएगी
कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा कि केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है कि राज्य में 20 सितंबर से धान की खरीद शुरू हो। उम्मीद है कि केंद्र से जल्द ही खरीद की अनुमति मिल जाएगी और अनुमति प्राप्त होते ही हम खरीद प्रक्रिया आरंभ कर देंगे। कहा कि इस बार प्रदेश में खाद की कमी नहीं होगी। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में खाद की उपलब्धता को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक हुई थी।
मुख्यमंत्री ने भी इस विषय पर केंद्रीय मंत्री से बात की है। कृषि मंत्री ने कहा कि अभी बाजार में बाजरे का भाव एमएसपी से नीचे है। अभी तक 10 हजार मीट्रिक टन बाजरे की खरीद हुई है। अभी सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अगर बाजार भाव यही रहता है तो प्रदेश सरकार भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को पैसा देगी या एमएसपी पर खरीद शुरू करेगी। किसान भाइयों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, सरकार उनके साथ है।
मंडियों के पास अग्निशमन वाहन तैनात होंगे
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस बार मंडियों के पास अग्निशमन वाहनों की तैनाती करें ताकि मंडी में होने वाली आगजनी की घटनाओं पर तुरंत काबू पाया जा सके। डिप्टी सीएम ने सोमवार को बताया कि किसानों की मांग को केंद्र को 20 सितंबर से धान और 25 सितंबर से बाजरा की खरीद शुरू करने का आग्रह किया है। वहीं, राज्य में मक्का की खरीद 20 सितंबर से, मूंग एक अक्तूबर से, तिल, अरहर , उड़द की खरीद एक दिसंबर से शुरू की जाएगी। इस बार धान की खरीद करने का लक्ष्य 60 लाख मीट्रिक टन रखा गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि धान खरीद के लिए 215 खरीद केंद्र , बाजरा के लिए 92, मक्का के लिए 19, सूरजमुखी के लिए 13, मूंग के लिए 38, तिल के लिए 27, अरहर के लिए 22 और उड़द के लिए 10 खरीद केंद्र निर्धारित किए गए हैं। सभी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी।