हरियाणा सरकार ने विकास परियोजनाओं के आड़े आ रहे भूमि अधिग्रहण का तोड़ निकाल लिया है। सरकार प्रदेश में किसी भी किसान की भूमि का अधिग्रहण जबरन नहीं करेगी।
नए विकास प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित क्षेत्र में किसानों की भूमि आने पर जमीन के बदले जमीन दी जाएगी। बुधवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन इस फार्मूला को सिरे चढ़ाने के लिए सरकार ने हरियाणा परियोजना भूमि समेकन विशेष उपबंध विधेयक 2017 पारित कर दिया। हालांकि, कांग्रेस और इनेलो ने विधेयक का विरोध किया और इसे विवादास्पद बताया। विपक्ष ने इसे चहेतों को लाभ पहुंचाने वाला विधेयक बताया है।
विपक्ष के शोरशराबे के बावजूद सरकार ने विधेयक पारित कर विकास प्रोजेक्ट के लिए भूमि लेने का रास्ता साफ कर लिया। नए कानून में प्रावधान है कि प्रोजेक्ट के एक या अधिक राजस्व संपदा में आने वाली परियोजना के कुल क्षेत्र की सत्तर फीसदी या अधिक भूमि पर सरकार का स्वामित्व होना चाहिए। बाकि भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने केलिए सरकार कुल परियोजना भूमि की चकबंदी कर सकती है। चकबंदी कर किसानों को जमीन के बदले उसी राजस्व संपदा में या आसपास की राजस्व संपदा में सरकार जमीन ही मुहैया कराएगी। इसके लिए किसानों को समान मूल्य की जमीन दी जाएगी। समान मूल्य की जमीन न होने पर कलेक्टर रेट जमा बीस प्रतिशत किसान को दिया जाएगा। इस फार्मूले के तहत जमीन देने वाले किसानों को सरकार प्रोत्साहन के तौर पर इंसेंटिव भी देगी। यह राशि जल्दी तय की जाएगी।