हरियाणा में भी अब एमबीबीएस व एमडी करने वाले विद्यार्थियों को एक से दो साल तक प्रदेश में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देने का सरकार के साथ बांड भरना होगा। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देशों के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। शुरुआत में यह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू होगा, बाद में इसे निजी मेडिकल कॉलेजों पर भी लागू किया जाएगा।
प्रदेश में पीजीआईएमएस रोहतक, खानपुर, मेवात, करनाल, अग्रोहा आदि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 850 से अधिक एमबीबीएस की सीटें हैं, जो इस साल से बढ़ने जा रही हैं। इन कॉलेजों में एमबीबीएस करने वाले विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होगा कि वह अपनी डिग्री पूरी करने के बाद एक साल प्रदेश में अपनी स्वास्थ्य सेवाएं देंगे। इन्हें बतौर जीडीएमओ रखा जाएगा और हाउस सर्जन का वेतन भी दिया जाएगा।
इससे पीजीआईएमएस में जहां हाउस सर्जन की कमी दूर होगी, वहीं प्रदेश में डॉक्टरों की कमी भी पूरी होगी। इसके साथ ही एमडी के लिए भी सरकारी संस्थान में एक साल की मेडिकल सर्विस अनिवार्य की जाएगी। इन्हें प्रदेश में मेडिकल ऑफिसर स्पेशलिस्ट का पद दिया जाएगा। इन डॉक्टरों से प्रदेश में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर होगी।
गौरतलब है कि यह नियम यदि सरकारी व निजी दोनों मेडिकल कॉलेजों में लागू होता है तो एक साल में सरकार को करीब 2000 अतिरिक्त डॉक्टर मिल जाएंगे। फिलहाल प्रदेश में 3200 डॉक्टरों की सीट पर महज 1600 ही सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में यदि 2000 डॉक्टर और मिलते हैं तो स्वास्थ्य विभाग की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी।