यह प्राइवेट स्कूलों को तंग करने की योजना है। फार्म नंबर-दो भरने से दोबारा जिला स्तरीय कमेटी स्कूलों का निरीक्षण करेगी, सभी शर्तें पूरी करने वाले स्कूल को स्थायी मान्यता दे दी जाएगी। अनेक स्कूल ऐसे भी हैं जो सरकार के वर्तमान नियम व शर्तों को पूरा नहीं करते। अगर उनकी मान्यता रद्द करने की सोची गई तो स्कूल संचालक सड़कों पर उतरेंगे।
स्कूल चल रहे या नहीं, यह देखेगा विभाग : प्रसाद
प्राइवेट स्कूल संघ का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सदन पंचकूला में संयुक्त निदेशक राजीव प्रसाद से मिला। प्रसाद ने कहा कि यह फार्म भरवाकर विभाग देखना चाहता है कि स्थायी मान्यता प्राप्त कितने स्कूल चल रहे हैं, और कितने नहीं। इस पर सत्यवान कुंडू ने कहा कि शिक्षा बोर्ड हर वर्ष स्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों से निरंतरता फीस के रूप में दो हजार रुपये भरवाता है, उससे पता चल जाता है कि स्कूल चल रहे हैं या नहीं। दोबारा फार्म भरवाने की बजाए शपथपत्र लेकर भी स्कूलों की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। संयुक्त निदेशक ने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया को सरल किया जाएगा।
सरकार की पहल का स्वागत : परमार
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बृजपाल परमार, महासचिव भारत भूषण बंसल और सचिव सलाऊद्दीन ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने देर से सही मगर उचित कदम उठाया है। स्थायी मान्यता के बाद रिन्यूअल की प्रक्रिया कभी शुरू ही नहीं हुई। अनेक निजी स्कूल आज भी एक-दो कमरों में चल रहे हैं।