स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों में सी-टू फार्मूले से हरियाणा ने किनारा कर लिया है। इस फार्मूले को प्रदेश सरकार न तो तर्कसंगत मानती है और न ही सूबे में इसे लागू किया जाएगा। इसके अलावा आयोग की 201 सिफारिशों को हरियाणा सरकार ने प्रदेश में लागू करने का मन बना लिया है। सरकार का दावा है कि किसानों के हित में हर सिफारिश और फैसला प्रदेश में लागू किया जाएगा।
बताते चलें कि स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में किसानों से जुड़ी दो सौ से अधिक सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों को लागू करने को लेकर बरसों से राजनीति चल रही है। प्रदेश सरकारें इन सिफारिशों को लागू करने के लिए स्वतंत्र हैं। हरियाणा में भी ये मुद्दा किसानों को लेकर की जाने वाली विभिन्न दलों की राजनीति का केंद्र बना रहा। हरियाणा सरकार ने इन सिफारिशों को लागू करने का मन तो बना लिया है और इस पर काम भी चल रहा है। इन्हीं सिफारिशों में सी-टू फार्मूला भी एक है।
जिसके तहत किसानों की जमीनों के रेट के आधार पर फसल का रेट तय करने की सिफारिश की गई है। मगर सरकार का दावा है कि इस सिफारिश को राज्य में लागू करना संभव ही नहीं है। हरियाणा की भौगोलिक स्थिति यदि देखें तो प्रदेश में जमीन का रेट 10 से 12 लाख रुपये प्रति एकड़ से लेकर 10 करोड़ प्रति एकड़ तक है। हर क्षेत्र के स्थानीय फैक्टर वहां जमीनों के रेट को प्रभावित करते हैं। इसलिए इस फार्मूले का हरियाणा में लागू करना सरकार तर्कसंगत नहीं मानती।