हरियाणा सरकार ने अब डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रदेश में पेपरलेस, कैशलेस और फेसलेस प्रशासन देने की तैयारी कर ली है। इसके तहत प्रदेश में लोगों को डिजिटल फार्मेट में दस्तावेज एवं प्रमाण-पत्र जारी करने और उनका सत्यापन करने के लिए एक ‘क्लाउड प्लेटफॉर्म’ उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से डिजीलॉकर शुरू किया है।
इस संदर्भ में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों, बोर्डों एवं निगमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों, मुख्य कार्यकारी अधिकारियों, सभी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार्स व एनआईसी की हरियाणा राज्य इकाई राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी को पत्र भी लिखा है।
डिजीलॉकर प्राधिकारी द्वारा डिजिटल तरीके से जारी एवं प्रमाणित दस्तावेज व प्रमाणपत्र प्राप्त करने का एक मंच है, जिससे भौतिक दस्तावेज का उपयोग समाप्त होगा। डिजीलॉकर के साथ जारीकर्ता संगठन के रूप में अपना पंजीकरण करवाने वाले विभाग व संगठन अपने द्वारा जारी किए जाने वाले ड्राइविंग लाइसेंस, मतदाता पहचान-पत्र, शैक्षणिक संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों द्वारा जारी प्रमाण-पत्र एवं अंक तालिका, राजस्व विभाग द्वारा जारी प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड, अन्य विभागों द्वारा जारी लाइसेंस, परमिट, कर्मचारी पहचान-पत्र जैसे दस्तावेजों एवं प्रमाण-पत्रों की इलेक्ट्रॉनिक प्रतियां नागरिकों के डिजीलॉकर खाते में सीधे उपलब्ध करवा सकते हैं।
इसी प्रकार विभाग ‘रिक्वेस्टर आर्गेनाइजेशन’ (निवेदक संगठन) के रूप में अपना पंजीकरण करवाकर डिजीलॉकर के साथ अपने ऑनलाइन अनुप्रयोग समेकित कर सकते हैं ताकि नागरिक विभागों द्वारा ऑनलाइन मांगे गए विभिन्न आवेदन जैसे कि प्रमाणपत्र, लाइसेंस, नौकरी, अनुदान, पेंशन, छात्रवृत्ति, स्कूल, कॉलेजों में दाखिले आदि के लिए आवेदन सीधे अपने डिजीलॉकर से प्राप्त कर सकें।
हरियाणा सरकार द्वारा सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों, स्वायत्त निकायों, शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों में डिजीलॉकर प्लेटफॉर्म शुरू करने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य में सभी विभागों और एजेंसियों को जारीकर्ता या रिक्वेस्टर के रूप में अपना पंजीकरण करवाना होगा।