लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी। किराएदार व लीज धारकों को प्रापर्टी का मालिकाना हक देने की मांग को हरियाणा सरकार ने मान लिया है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन ने बताया कि प्रदेश के ऐसे दुकानदार या किराएदार, जिन्होंने लगभग 30 से 40 वर्षों से शहरी स्थानीय निकायों से कोई प्रापर्टी लीज या रेंट पर ली हुई है, उन्हें उस प्रापर्टी का मालिकाना हक देने के लिए जल्द ही एक सर्वे करवाया जाएगा।
सर्वे के बाद संबधित दुकानदार या किराएदार को कलेक्टर रेट पर प्रापर्टी का मालिकाना हक दे दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस संबध में मंजूरी दे दी है। इस फैसले से प्रदेश के शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिलेगी और मालिकाना हक दिए को लेकर लंबे अर्से से विभिन्न न्यायालयों में चल रहे मामलों का भी निपटान होगा।
कविता जैन ने बताया कि इस संबध में एक राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो यह आंकलन करेगी कि संबंधित दुकानदार या किराएदार को मार्केट रेट पर प्रापर्टी का मालिकाना हक दिया जाए या कलेक्टर रेट पर। यह आंकलन इसलिए जरूरी है क्योकि कई स्थानों पर मार्केट रेट कलेक्टर रेट से कम होते हैं।
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री ने कहा कि इस निर्णय से सरकार को काफी राजस्व भी प्राप्त होगा। फिलहाल, इस प्रकार की प्रापर्टी से निकायों को काफी कम आय हो रही है।
डेढ़ दशक पुरानी है मालिकाना हक की मांग
कविता जैन ने माना कि डेढ़ दशक से ज्यादा समय से संबंधित दुकानदारों या किराएदारों द्वारा मालिकाना हक देने की मांग उठाई जा रही है। पूर्व की सरकार द्वारा इस दिशा में एक कमेटी भी गठित की गई थी, लेकिन इस कमेटी की एक भी बैठक आयोजित नहीं हुई।
अब इस विषय को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के दिशा-निर्देश पर व्यवहारिक तरीके से खत्म किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 1972 में रेट निर्धारण करके मकानों का मालिकाना हक प्रदान किया गया था। उसके बाद से अब तक लीज व किराए पर दी गई संपत्ति का मालिकाना हक किसी को नहीं दिया गया है।
उन्होंने बताया कि बीते कांग्रेस शासन के दौरान वर्ष 2006 में प्रॉपर्टी हैंडलिंग एक्ट बनाकर डीसी, चेयरमैन नगर परिषद और एक्सईएन बीएंडआर को शामिल करते हुए एक कमेटी तो बनाई गई, लेकिन उस कमेटी की कभी बैठक ही नहीं हुई।
कांग्रेस ने 500 रुपये से कम किराये वालों को राहत देने की घोषणा भी की, लेकिन वह योजना भी सिरे नहीं चढ़ी। अंबाला शहर में जगाधरी गेट के 18 दुकानदारों ने इस योजना के तहत मालिकाना हक के लिए आवेदन दिया, लेकिन उनकी मांग पर कोई निर्णय नहीं होने पर वे पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय चले गए।
इस पर उच्च न्यायालय ने स्थानीय निकाय विभाग को जल्द निर्णय लेने का आदेश दिया। विभाग ने इस मामले में संज्ञान लेकर नीतिगत निर्णय लेते हुए आदेश जारी कर दिया कि पूरे प्रदेश में किराए पर दी गई व्यापारिक संपत्ति, चाहे वह कितने रुपये मासिक भी किराए पर हो, उसे मार्केट रेट की बजाय कलेक्टर रेट पर रजिस्ट्री करा दी जाए। सरकार का मत था कि दुकानदार लंबे समय से दुकानों में बैठे हैं, इसलिए रजिस्ट्री कलेक्टर रेट पर ही करवाई जाए।