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भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले- जेजेपी और निर्दलीय विधायकों को किसानों से ज्यादा कुर्सी प्यारी

Wed, 02 Dec 2020 09:17 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार का साथ दे रहे जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) और निर्दलीय विधायकों को किसान से ज्यादा कुर्सी प्यारी है। उन्हें किसानों का साथ देने के लिए फौरन इस सरकार से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। आज प्रदेश का अन्नदाता सड़कों पर है और उनका वोट लेने वाले जेजेपी और निर्दलीय विधायक सत्ता का लुफ्त उठा रहे हैं। 

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किसान का वोट लेकर किसान विरोधी सरकार और नीतियों का साथ देने वालों के प्रति जनता में रोष है। ये विधायक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों पर लाठियां, आंसू गैस और वाटर कैनन चलाने वाली सरकार के खिलाफ एक शब्द नहीं बोल रहे। हुड्डा ने कहा कि कई महीने से प्रदेश का किसान धरना-प्रदर्शन कर रहा है। बावजूद इसके सरकार टस से मस होने का नाम नहीं ले रही। 


सरकार के रवैये को देखकर स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में ये आंदोलन और बड़ा हो सकता है। जिम्मेदार विपक्ष होने के नाते हम किसानों की मांगों के साथ खड़े हैं लेकिन किसानों का वोट लेकर विधानसभा में पहुंचे जेजेपी और निर्दलीय विधायक सरकार के साथ हैं। इन विधायकों को वोट देने वाले किसान आज अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। क्योंकि किसानों ने इन्हें बीजेपी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए वोट दिए थे।
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पंजाब में अकाली दल ने भाजपा का साथ छोड़ दिया है। राजस्थान की आरएलपी ने भी एनडीए छोड़ने की बात कही है। इतना ही नहीं, हरियाणा में भी सरकार को समर्थन दे रहे दो विधायकों ने चेयरमैन पद को त्यागते हुए सरकार से बगावत का एलान किया है। स्पष्ट है कि बीजेपी-जेजेपी सरकार की नींव हिलने लगी है।

दुष्यंत निर्णय करें, सत्ता की मलाई जरूरी या किसान की भलाई : सुरजेवाला
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि जजपा के लिए सत्ता की मलाई जरूरी है या फिर किसानों की भलाई। ये निर्णय दुष्यंत चौटाला और उनकी पार्टी को करना पड़ेगा। वे सत्ता से चिपके क्यों बैठे हैं, आज जब पूरे देश का किसान कराह रहा है। उन्होंने कहा कि दुष्यंत जी, अगर किसान की भलाई प्यारी है तो आज ही उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। 

जजपा, भारतीय जनता पार्टी की सरकार से समर्थन वापस ले, यह असली इम्तिहान है। मोदी सरकार, किसान व किसानी को खत्म करने पर तुली है। पिछले एक हफ्ते से देश का किसान करो या मरो आंदोलन की राह पर है। किसान-मजदूर की आत्मा कराह रही है, देश की मिट्टी, खेत-खलिहान न्याय मांग रहे हैं। अन्नदाता अपना अधिकार मांग रहा है और मोदी सरकार उन्हें घाव देने में जुटी है।

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