यमुना नदी अब खतरे के निशान 231.50 मीटर से नीचे आ गई है। कैथल में घग्गर नदी 29 फीट से घटकर 26.6 फीट पर आ गई है। फिर भी नदी का जल स्तर खतरे के निशान 3.6 फीट अधिक है। अंबाला शहर की अधिकांश कॉलोनियों से पानी निकासी हो गई है लेकिन अंबाला छावनी में कुछ कॉलोनियों में अभी जलभराव है।
यमुनानगर में शुक्रवार दोपहर बाद हथिनी कुंड बैराज पर जलस्तर 68,037 क्यूसेक दर्ज किया गया। वहीं, यमुना नदी से लगते गांव टापू कमालपुर में तेजी से भूमि का कटाव हो रहा है। प्रशासन ने कटाव पर निगरानी के लिए तीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए हैं। साथ ही सेना को लगाया गया है। करनाल के 46 गांवों में अभी बाढ़ का पानी भरा है। इनमें से 20 गांवों का संपर्क पूरी तरह से शहर से कटा है। सोनीपत में भी यमुना का जलस्तर कम हुआ है लेकिन किसानों व लोगों की परेशानी बरकरार है।
बर्बाद फसल देख सदमे से किसान की मौत
यमुनानगर के गांव सुखदासपुर में बाढ़-बारिश के पानी से बर्बाद हुई फसल देख किसान इंद्राज सहन नहीं कर सका। आठ एकड़ में लगी धान की फसल चार फीट पानी में डूबी हुई थी। सदमे से उसकी तबीयत बिगड़ गई। रास्ते में पानी जमा होने के कारण उन्हें ट्रैक्टर-ट्राली में डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उपचार के बाद डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सिरसा-फतेहाबाद के स्कूलों में छुट्टियां
बाढ़ से स्थिति खराब होने के चलते सिरसा के 49 गांवों के स्कूलों में 18 जुलाई तक छुट्टियां कर दी हैं। फतेहाबाद के जाखल के बाद रतिया व टोहाना खंड के 12वीं तक के स्कूलों में 23 जुलाई तक छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं।