देश में नोटबंदी के बाद सरकारी विभागों को कैशलेस करने की मुहिम हरियाणा में धराशायी होती दिख रही है। विभागों में कैशलेस सिस्टम प्रभावी तरीके से लागू हो ही नहीं पाया। हरियाणा बीज विकास निगम को ही ले लो।
नोटबंदी के बाद निगम को पूरी तरह से कैशलेस करने का निर्णय लिया गया था। सरकार ने सभी 74 बीज बिक्री केंद्रों को कैशलेस करने के निर्देश दिए थे। किसानों को कैशलेस होने के लिए ज्यादा से ज्यादा जागरूक करना था। निगम की ओर से अभियान भी चलाया गया। किसानों को गांव-गांव जाकर कैशलेस लेनदेन की ट्रेनिंग दी गई।
शुरुआत में 8 बीज बिक्री केंद्रों को कैशलेस किया गया, इनसे लेनदेन का अच्छा रिस्पांस आने पर सभी केंद्र में मशीनें लगनी थी। लेकिन, किसानों ने कैशलेस की बजाय कैश को ही तरजीह दी। कैशलेस मशीनों से न के बराबर लेनदेन ही हो रहा है। इसे देखते हुए बीज विकास निगम ने अन्य 66 केंद्रों को भी कैशलेस करने से कदम पीछे खींच लिए हैं।
कैशलेस के बजाय सुधारें आर्थिक दशा
Punjab farmer
- फोटो : File Photo
कार्ड इस्तेमाल से किसानों का परहेज
बिक्री केंद्रों को कैशलेस करने के बाद निगम ने किसानों को लेनदेन के लिए कार्ड वितरित करने शुरू किए। कुछ किसानों ने जिलों में कार्ड ले लिए, जबकि अधिकांश ने रुचि ही नहीं दिखाई। उनका कार्ड न लेने का बड़ा कारण कार्ड इस्तेमाल करने की जानकारी न होना, तय राशि से कहीं अधिक पैसे न वसूल लिए जाएं, रहा। सरकार कैशलेस कार्ड को लेकर किसानों का भरोसा ही नहीं जीत पाई।
कैशलेस के बजाय सुधारें आर्थिक दशा
भाकियू के राष्ट्रीय प्रधान गुरनाम सिंह चढूनी व हरियाणा इकाई प्रधान कर्म सिंह मथाना ने कहा कि सरकार की पहल अच्छी थी। मगर, अधिकांश किसान एटीएम कार्ड का इस्तेमाल जानते ही नहीं। इसी तरह बीज बिक्त्रस्ी केन्द्रों के कैशलेस कार्ड को भी उन्होंने नहीं अपनाया। सरकार इसके बजाय किसानों की आथिज़्क स्थिति सुधारने पर ध्यान दे।
किसानों को दोबारा करेंगे जागरूक : बेनीवाल
बीज विकास निगम के चेयरमैन पवन बेनीवाल ने कहा कि 8 बीज बिक्री केंद्र कैशलेस हो चुके हैं। किसानों ने ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया। सभी केंद्र कैशलेस करने से पहले बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाएंगे।