हरियाणा पर मध्य प्रदेश के किसान आंदोलन की छाया पड़ गई है। भारतीय किसान यूनियन की हरियाणा इकाई ने एमपी के किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए छह जिलों कैथल, हिसार, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, सोनीपत और अंबाला में बेमियादी धरने शुरू कर दिए हैं। अन्य जिलों में जल्द धरने शुरू करने की तैयारी चल रही है।
प्रदेश के किसानों की तीन मुख्य मांगें हैं। इनमें स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करना, किसानों का कर्ज माफ नहीं, बल्कि साफ करना और किसानों को पेंशन देना शामिल है। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रधान गुरनाम सिंह चढ़ूनी और प्रदेश प्रेस प्रवक्ता राकेश कुमार ने बताया कि धरने शांतिपूर्वक चलेंगे। मध्य प्रदेश में किसानों पर गोली चलाकर लोकतंत्र की हत्या की गई है।
हरियाणा में किसान अपनी मांगें पूरी कराकर ही दम लेंगे। उन्हें कर्ज माफी नहीं, बल्कि पूरा कर्ज साफ चाहिए, चूंकि ये कर्ज उन पर सरकार के तय से कम न्यूनतम समर्थन मूल्य देने के कारण चढ़ा है। आंदोलन की आगामी रणनीति शनिवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय किसान महासंघ की आपात बैठक में बनाई जाएगी। गुरनाम सिंह चढ़ूनी भी इसके संयोजक हैं। इसमें किसानों के हित में केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की भी समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही आंदोलन की दशा और दिशा तय होगी।