हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने किया ट्वीट।
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उन्हीं दिनों में उन्होंने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से संपर्क किया। वहां मिश्रित खेती करने की सलाह मिली। नरेंद्र ने बताया कि बाद में परंपरागत फसल के साथ सब्जी लगाने लगे। इससे फायदा ये हुआ कि घर का रोजाना का खर्चा सब्जी से निकल जाता था। छह माह बाद परंपरागत फसल बेचते, वह बचत होती थी। इसके बाद सब्जी उत्पादन बढ़ाते गए। कमाई भी बढ़ती गई, जिससे धीरे -धीरे और जमीन खरीद ली।
अब एक एकड़ में गेहूं, 12 एकड़ में सब्जी
नरेंद्र के परिवार के पास अब साढ़े 13 एकड़ जमीन है। आधा एकड़ में पॉली हाउस लगाया हुआ है। एक एकड़ में गेहूं बीज रखा है। बाकी 12 एकड़ जमीन पर सब्जी उत्पादन, किन्नू व बेरी की बाग है। पॉली हाउस में सब्जी की पौध तैयार करते हैं। वह बताते हैं कि प्याज व गाजर के बीज उत्पादन में हर साल सात से आठ लाख की बचत होती है।
सब्जी बेचकर खरीदी है बाकी जमीन
नरेंद्र ने बताया कि उनके पास दो एकड़ जमीन थी। पिछले दस साल के दौरान हमने सब्जी उत्पादन पर जोर दिया। पहले यह देखते हैं कि बाजार में किस सब्जी की मांग ज्यादा है और उस पर लागत कितनी है। उसी आधार पर खेती करते हैं। पूरा साल मेहतन करते हैं। इसी मेहनत के दम पर पिछले 10 सालों में उन्होंने 11 एकड़ जमीन खरीद ली है। इसके अलावा कुछ जमीन ठेके पर भी ले लेते हैं।
अब किसानों को बिजनेसमैन की तरह सोचना होगा। किसान वह खेती न करें, जो उसके लिए सुविधाजनक है। बल्कि वह खेती करें, जिसकी बाजार में मांग है। इसके लिए मेहनत भी करनी पड़ेगी। मगर मुनाफे की गारंटी है। - नरेंद्र कुमार, प्रगतिशील किसान, गांव धारनियां।