अपने परिवार के साथ मिलकर खेती के साथ-साथ दो एकड़ में स्ट्राबेरी व बाद में उसी दो एकड़ में सब्जियां लगाई। जिससे उसको अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इसके बाद गेंदे व गुलाब के पौधे भी लगाए, जिससे उसे हर वर्ष ज्यादा आमदनी शुरू हो गई। उसने बताया कि उसके चार एकड़ भूमि में खाने के लिए गेहूं व सरसों कपास, नरमें आदि की खेती करता है।
इस बार उसने एक एकड़ में तरबूज, आधा एकड़ में टमाटर, आधा एकड़ में तोरी, दो कनाल में हरी मिर्च की खेती की जिसे अब तक 3 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है। उसने बताया कि इन सब्जियों में कभी रासायनिक खाद का प्रयोग नहीं किया। हमेशा गोबर की खाद व जैविक खाद का प्रयोग किया है और कीटनाशक भी ऑर्गेनिक प्रयोग करते हैं।
चोपटा में विकसित हो फूलों व सब्जी की मंडी
ईश्वर कड़वासरा ने बताया कि उसके क्षेत्र के आसपास सब्जी या स्ट्राबेरी, फूलों व फलों की मंडी न होने के कारण अन्य स्थानों पर ले जाकर बेचने में यातायात खर्च ज्यादा आता है तथा बचत कम होती है। इस बार लॉकडाउन के चलते स्ट्राबेरी से कोई फायदा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि अब तो आसपास के किसानों का रुझान भी सब्जी लगाने की ओर बढ़ने लगा है, जिससे परंपरागत खेती के साथ अतिरिक्त कमाई होने लगी है। उसका कहना है कि अगर सब्जी की मंडी चोपटा में स्थापित हो जाए तो यातायात खर्च कम होने से बचत ज्यादा हो जाएगी।