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चुनावी मुद्दा: वोट दिलाएंगे बिजली के झटके

Mon, 08 Sep 2014 05:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अदानी द्वारा हरियाणा की बिजली बंद करने के बाद हरियाणा में बिजली इस बार चुनावी मुद्दा बन गया है। सूखे के समय बिजली संकट ने कांग्रेस को एक नया मुद्दा दे दिया है। हालांकि हरियाणा सरकार बिजली संकट पैदा नहीं होने का दावा कर रही है।
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उधर, मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के अलावा केंद्रीय ऊर्जा एवं कोयला मंत्री पियूष गोयल से बात कर कोयला ब्लाक आवंटित करने के लिए कहा है।

हरियाणा में रविवार को 5257 मेगावाट बिजली की डिमांड थी, लेकिन 4827 मेगावाट उपलब्धता थी। सरकार ने किसानों और अन्य उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई तो की, लेकिन जरूरत के मुताबिक आपूर्ति नहीं हो सकी।
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हालांकि कोयले की कमी के कारण भी उत्पादन पर असर पड़ा है। हरियाणा में बिजली उत्पादन क्षमता 4974 मेगावाट है जबकि उत्पादन करीब 2436 मेगावाट रह गया है।
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भाजपा और कांग्रेस का ये है कहना

ओछी राजनीति: उधर, भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर ओछी राजनीति का आरोप लगाया है। भाजपा के प्रवक्ता वीर कुमार यादव के मुताबिक यह समझौता एक निजी कंपनी और हरियाणा सरकार के बीच हुआ है।

भाजपा का इसमें कोई रोल नहीं है। भाजपा खुद बिजली रोके जाने की खिलाफत करती है। फिलहाल मुख्यमंत्री इसका राजनीतिक लाभ लेने के बजाए, जनता को दूसरे प्रदशों से बिजली खरीद कर उपलब्ध करवाएं।

जनता के बीच जाएंगेः हरियाणा कांग्रेस के प्रवक्ता रण सिंह मान ने कहा कि यदि एनडीए सरकार ने इस मसले को गंभीरता से नहीं लिया तो यह मसला प्रदेश की जनता के बीच ले जाया जाएगा। यह एक साजिश है। जिसको लेकर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी। मान ने कहा कि भाजपा आर्थिक तौर पर हरियाणा को नुकसान पहुंचाकर विधानसभा चुनाव में जीत के मंसूबे पाले है जो पूरे नहीं होंगे।
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