हरियाणा विधानसभा चुनाव संपन्न होने के साथ ही प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम मशीनों में कैद हो गया है।
मतदान के बाद ही राजनीतिक दलों के उम्मीदवार गणित लगाते में जुट गए हैं। लेकिन असल तस्वीर 19 अक्तूबर को दोपहर बाद साफ होगी। हरियाणा में किसकी सरकार बनेगी और कौन विपक्ष के तौर पर विधानसभा में भूमिका निभाएगा।
सभी समीकरण मतगणना के बाद स्पष्ट होंगे। लोकसभा चुनाव के बाद सफलता की उम्मीद लगाए भाजपा को कितनी सीटें मिलेगी। इनेलो कितनी सहानुभूति हासिल करेगी और कांग्रेस को विकास का कितना लाभ मिलेगा। इन सभी बातों पर मंथन के बाद मतदाताओं ने अपना फैसला दे दिया है। जिसके बाद नेताओं को नतीजों के आने का इंतजार है।
मतदान कम और अधिक होना भी इस चुनाव में चर्चा का विषय है। मतदान का रिकार्ड टूटने को लोग मोदी की लहर और कांग्रेस के खिलाफ जोड़ रहे हैं। जबकि इनेलो इसे अपने पक्ष में मान कर चल रही है।
उम्मीदवारों को फील्ड की मेहनत से भले ही निजात मिल गई है, लेकिन 19 अक्तूबर तक उनके माथे पर चिंता की लकीरें छाई रहेंगी।
रिकार्ड मतदान से चुनाव आयोग गदगद: हरियाणा में रिकार्ड मतदान के बाद चुनाव आयोग गदगद है। आयोग इसे अपने प्रचार अभियान से जोड़ कर देख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित करने में आयोग ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
हालांकि ग्रामीण क्षेत्रो में धान की फसल का समय होने से लोगों की व्यस्तता भी रही, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रो में लोगों ने लोकतंत्र के इस पर्व पर बखूबी अपनी जिम्मेदारी निभाई है।