पैनल तैयार करते समय प्रत्येक पहलू पर विचार किया गया है। शनिवार की बैठक में अंतिम रिव्यू के बाद पैनल हाईकमान को भेज दिया जाएगा, जिसमें से प्रत्याशियों की सूची जारी की जाएगी।
अब उनकी दावेदारी पर विचार नहीं किया जा सकता। हालांकि, वह प्रदेश अध्यक्ष से जरूर इस बारे में अपनी बात रख सकते हैं। बबली ने लोकसभा चुनाव में कुमारी सैलजा का खुलकर समर्थन किया था और उनकी अगुवाई में ही वह कांग्रेस का दामन थामने की कोशिश में हैं, लेकिन बाबरिया ने साफ कर दिया कि कांग्रेस में एंट्री और टिकट प्रदेश अध्यक्ष की सिफारिश पर ही मिलेगा।
अब बबली मझधार में फंस गए हैं, क्योंकि भाजपा से वह पहले ही नाता तोड़ चुके हैं और उनके धुर विरोधी राज्यसभा सदस्य सुभाष बराला उनके भाजपा में जाने में रोड़ा हैं। जजपा से वह पहले ही बगावत कर चुके हैं। अब उनके पास निर्दलीय चुनाव लड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है।