मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात रहे विशेष अधिकारी (ओएसडी) की हसरत पूरी नहीं हुई। मनोहर और नायब के किसी भी विशेष अधिकारी या सलाहकार को टिकट नहीं दिया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात रहे विशेष अधिकारी (ओएसडी) इस बार चुनाव मैदान में उतरकर जनता आशीर्वाद लेना चाह रहे थे, लेकिन उनकी तैयारियां धरी की धरी गईं। टिकट के लिए भागदौड़ कर रहे ऐसे 10 नेताओं को भाजपा की सूची में जगह नहीं मिली है।
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भाजपा हाईकमान ने मनोहर लाल और नायब सैनी के किसी भी ओएसडी और सलाहकार को टिकट नहीं दिया है, बल्कि फील्ड में जनता से जुड़कर रहने वाले नेताओं पर विश्वास जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल और मौजूदा सीएम नायब सिंह सैनी से नजदीकी के दम पर भाजपा के टिकट पर चुनावी ताल ठोकने के सपने देखने वाले नेताओं के सपनों पर हाईकमान ने पानी फेर दिया है।
इनमें पहला नाम पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी का है। बेदी पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के राजनीतिक सचिव भी रहे हैं। वह शाहाबाद से अपना टिकट तय मान रहे थे, लेकिन उनका जमीन से जुड़ाव न होना और स्थानीय लोगों में उनके खिलाफ आक्रोश के चलते टिकट नहीं दिया गया।
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सीएमओ में मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे चुके कैप्टन भूपेंद्र सिंह नलवा से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने रणधीर सिंह पनिहार पर भरोसा जताया है। पूर्व सीएम मनोहर लाल के दो बार ओएसडी रहे जवाहर यादव ने गुरुग्राम की बादशाहपुर सीट से चुनाव लड़ने की पूरी तैयारियां कर रखी थी।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के दम पर वह पूरी तरह से चुनावी मैदान में उतर चुके थे, लेकिन राव नरबीर उन पर भारी पड़े। फरीदाबाद सीट से पूर्व सीएम मनोहर लाल के राजनीतिक सचिव रहे अजय गौड़ तैयारी में थे। आखिरी समय में पूर्व उद्योग मंत्री विपुल गोयल के चलते उनको निराशा का सामना करना पड़ा।
पूर्व मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे एचसीएस अधिकारी अमरजीत सिंह रोहतक के कलानौर हलके से चुनाव लड़ना चाहते थे। उनका नाम भी पैनल में शामिल था, लेकिन भाजपा ने कलानौर से रोहतक नगर निगम की पूर्व मेयर रेणु डाबला को टिकट दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के ओएसडी रहे अभिमन्यु राव कोसली हलके से चुनावी तैयारियों में जुटे थे।
उन्होंने पूरे हलके में पोस्टर भी लगवा दिए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई जनाधार नहीं होने के चलते वह भी टिकट की दौड़ से बाहर रह गए। सीएम नायब सिंह सैनी के सलाहकार (पब्लिसिटी) तरुण भंडारी पंचकूला से, राजनीतिक सलाहकार बीबी भारती पिहोवा से, मीडिया सलाहकार (नई दिल्ली) राजीव जेटली बड़खल से और मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय पिहोवा से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे।
इसलिए नहीं मिला टिकट
भाजपा सूत्रों के अनुसार हाईकमान के पास रिपोर्ट पहुंची थी कि सत्ता में रहते इन विशेष अधिकारियों का फील्ड से जुड़ाव नहीं रहा। दूसरा, इनके खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी भी ज्यादा थी। इसलिए भाजपा ने न तो मनोहर लाल के किसी विशेष अधिकारी को चुनाव मैदान में उतारा और न ही नायब सिंह सैनी के किसी विश्वासपात्र पर दांव खेला।
संगठन के बड़े पदाधिकारी भी देखते रहे टिकट की राह
पहली सूची में भाजपा ने संगठन के बड़े नेताओं को भी टिकट देने से परहेज किया है। इनमें खुद प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली का नाम शामिल है। हालांकि बड़ौली ने कुछ दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस बार वे चुनाव नहीं लड़ेंगे। इनके साथ ही पार्टी महामंत्री सुरेंद्र पूनिया हिसार और डॉ. अर्चना गुप्ता पानीपत से टिकट की दौड़ में शामिल थे, लेकिन बात नहीं बनी।
पूर्व महामंत्री एडवोकेट वेदपाल को पिछली बार पूंडरी से टिकट दिया गया था, लेकिन इस बार उनको भी मौका नहीं दिया गया है। करनाल से पूर्व सांसद संजय भाटिया विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में थे, लेकिन तीन दिन पहले चुनाव लड़ने से इन्कार के बाद सूची में उनका नाम भी नहीं है।