हरियाणा में अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी फिर से करनाल विधानसभा सीट से ही ताल ठोकेंगे। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सैनी और उनकी टीम ने इस सीट से चुनावी तैयारी शुरू कर दी है।
खुद सीएम सैनी ने करनाल में अपनी सक्रियता बढ़ाई है। इनके अलावा सीएम ने अपने ओएसडी संजय बठला के अलावा प्रतिनिधि के तौर पर कैलाश सैनी को करनाल में बैठाना शुरू कर दिया है। सीएम की पत्नी सुमन सैनी धन्यवादी दौरे के माध्यम से दोबारा जनता के बीच में उतर गई हैं।
सूत्रों का दावा है कि इससे पहले सरकार और संगठन की ओर से सर्वे कराया गया है। इसमें नायब सिंह सैनी के लिए करनाल को सुरक्षित सीट बताई गई है। इसलिए सैनी और उनकी टीम ने करनाल में अपने दौरे बढ़ा दिए हैं। इससे पहले 2014 में मनोहर लाल करनाल आए थे और लगातार दो बार यहां से विधायक बने। इसी प्रकार अब नायब सैनी करनाल की धरती को अपनी कर्म भूमि बनाने की तैयारी में हैं। हालांकि, भाजपा का यह फैसला कई स्थानीय भाजपा नेताओं की बेचैनी बढ़ा सकता है, क्योंकि पिछले दस साल से कई नेता विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन हर बार चूक जाते हैं।
इसलिए सुरक्षित सीट है करनाल
करनाल सीट को नायब सैनी के लिए सुरक्षित इसलिए माना जा रहा है क्योंकि सैनी भाजपा के सीएम फेस हैं और दूसरा करनाल लोकसभा से सांसद मनोहर लाल केंद्र में कैबिनेट मंत्री हैं। शहर में पंजाबी समाज का वोट बैंक अधिक है और भाजपा का लगता है कि मनोहर लाल के नाम पर सैनी को यह वोट बैंक आसानी से मिल सकता है। इसके साथ ही उपचुनाव में सैनी और उनका परिवार करनाल विधानसभा में पसीना बहा चुका है और शहर में अपनी टीम भी तैयार कर चुके हैं।
नारायणगढ़ इसलिए नहीं सुरक्षित
2014 में नायब सिंह सैनी नारायणगढ़ सीट से विधायक चुने गए थे और सरकार में खनन मंत्री बने थे। 2019 में वे कुरुक्षेत्र से सांसद चुने गए। नारायणगढ़ विधानसभा सीट अंबाला लोकसभा क्षेत्र में आती है और पिछले काफी समय से सैनी यहां कम सक्रिय हैं। लोकसभा चुनाव में नारायणगढ़ विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी बंतो कटारिया की बजाय कांग्रेस के वरुण चौधरी आगे रहे थे। इतना ही नहीं सीएम सैनी के पैतृक गांव मिर्जापुर माजरा के बूथ नंबर 122 पर भी कांग्रेस प्रत्याशी को 450 वोट मिले हैं तो भाजपा प्रत्याशी को 364 मतों से संतोष करना पड़ा। इसलिए अब सैनी नारायणगढ़ की बजाय करनाल से ही चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।