हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अलग विधानसभा के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि चंडीगढ़ में हम अपना अलग विधानसभा भवन बना रहे हैं तो उसमें आम आदमी पार्टी को आपत्ति क्यों है। हरियाणा अपना काम करेगा, पंजाब सरकार अपना करें। हम चंडीगढ़ में जमीन मुफ्त में नहीं, 10 एकड़ के बदले लगती उतनी ही जमीन दे भी रहे हैं। यह सब चंडीगढ़ प्रशासन को देखना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान विधानसभा भवन हरियाणा और पंजाब के बीच बंटा हुआ है। बंटा हुआ हिस्सा भी हमारे पास रहेगा। चूंकि, यह विधानसभा भवन छोटा पड़ता है और 2026 में परिसीमन होने पर विधानसभा सदस्यों की संख्या बढ़ने की संभावना है। वर्तमान सदस्यों के लिए ही जगह छोटी पड़ रही है, बढ़े हुए सदस्यों के लिए वर्तमान भवन में स्थान नहीं रहेगा।
सुविधाएं उपलब्ध करवाने में दिल्ली से आगे
मनोहर लाल ने कहा कि सुविधाएं उपलब्ध करवाने में हरियाणा दिल्ली से कहीं आगे है, इसलिए आम आदमी पार्टी हरियाणा में कहीं टिक नहीं पा रही है। हाल ही में हुए आदमपुर उपचुनाव में आम आदमी पार्टी को कुल डेढ़ लाख वोटों में से केवल 3700 ही मिले। यह पार्टी सरकार बनाने का सपना लेती है, वहां मतदाताओं ने इनका बोरिया बिस्तर बांध दिया।
लोगों को अंधेरे में रखकर जिस पार्टी की शुरूआत हुई, वह किसी तरह से लोगों में भ्रम पैदा कर एक दो राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब भी हो गई। वाराणसी, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा में इन्होंने प्रयोग कर देख लिया, इनकी दाल नहीं गल रही है। गुजरात में भी ये मुंह की खा कर आएंगे।
आप के साथ अवांछित लोगों के संबंध
उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेताओं के अवांछित लोगों के साथ संबंध होने का आरोप लगाया। मनोहर लाल ने कहा कि अवांछित लोग इनके साथ पाए गए हैं। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में क्लासरूम घोटाला किया, जिसमें 1300 करोड़ रुपये का गबन हुआ। दिल्ली सरकार 1075 स्कूल चला रही है, जबकि इससे ज्यादा 1100 स्कूल तो एमसीडी संचालित हैं।
बार-बार काठ की हांडी नहीं चढ़ती
उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए ये किसानों को दोषी ठहराते हैं। इन्होंने किसान पराली न जलाए, इसके लिए 40,000 की दवा खरीदी और उसके वितरण पर 11 लाख रुपये खर्च किए, जबकि प्रचार पर 14 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इनकी दवा से केवल 350 किसान लाभान्वित हुए। दिल्ली सरकार जीएसटी का सारा पैसा हजम कर गई। दिल्ली में ये किसी तरह सफल हो गए लेकिन बार-बार काठ की हांडी नहीं चढ़ती।