देश भर में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बयान देते हुए कहा है कि हड़ताल से नुकसान किसानों का ही होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 'किसान अवकाश' पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसानों के पास कुछ मुद्दा नहीं है। उनका मकसद, अनावश्यक ही मीडिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना है। अगर वे अपने उत्पाद नहीं बेच रहे हैं तो इसमें नुकसान उन्हीं का है।
हरियाणा में किसानों को मंडी में घुसने नहीं दिया
किसान आंदोलन
हरियाणा में किसानों के बंद का सभी जिलों में मिलाजुला असर देखने को मिला। हालांकि एक दो जगहों से दूध और सब्जी गिराने के समाचार भी हैं। वहीं किसान संगठन आंदोलन को सफल बनाने के लिए शनिवार से नाके लगाने की तैयारी में हैं सोनीपत, रोहतक, भिवानी, नारनौल में बंद का कोई असर नहीं है। सोनीपत मंडी एसोसिएशन प्रधान ललित खत्री ने बताया कि मंडी में रोजाना की तरह सब्जी पहुंची है। वहीं दूध भी डेरी पर गांव से आया है।
हिसार के वीटा मिल्क चिलिंग सेंटर में जहां वीरवार को 11:00 बजे तक 7672 लीटर दूध आया था, वहीं शुक्रवार को सुबह 11:00 बजे तक मात्र 75.500 लीटर दूध ही पहुंचा था। उधर, सिटी के मानव चौक पर किसान धरने पर हैं. पुलिस बल तैनात है। अंबाला सिटी में कुछ दूध वालों को रोकने की सूचना आई है। किसान कल से जिला में नाका लगाने की तैयारी में हैं। नई अनाज मंडी में बंद का असर देखने को मिला। चारा मंडी भी बंद रही और चारा मंडी में नहीं आया है।
फिलहाल दूध-सब्जी की किल्लत नहीं है लेकिन आम लोगों में डर फैल गया है और लोग दुकानों ज्यादा मात्रा में दूध के पैकेट खरीद रहे हैं। फतेहाबाद में गांव बंद आंदोलन कई जगह हिंसात्मक हो गया। गांव धांगद में ग्रामीणों ने सब्जियों की गाड़ी रुकवा कर सड़क पर फेंक दीं। शहर के बिघड़ रोड पर एक दूध डेयरी को बंद करवाने का प्रयास किया, डेयरी संचालक ने मना किया तो उससे मारपीट की गई। दोनों घटनाओं में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इसके अलावा गांव बोदिवाली, जाखल के तलवाड़ा में भी सब्जी गिराने की सूचना है।