हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों में कार्यरत 4073 गेस्ट टीचरों को हटाने के संबंध में हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामे के बाद सभी गेस्ट टीचरों में हड़कंप है। अपनी मांगों और पक्के होने की जिद लेकर पिछले कई दिनों से गेस्ट टीचर सीएम मनोहर लाल खट्टर के विधानसभा क्षेत्र करनाल में डेरा जमाए हुए हैं।
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इस मुद्दे पर हरियाणा सरकार भी पसोपेश में हैं, क्योंकि हाईकोर्ट में दिए हलफनामे के तहत सरकार को दो हफ्तों में इन गेस्ट टीचरों को स्कूलों से हटाना है। ये हलफनामा सरकार ने हाईकोर्ट में इस संबंध में लंबे समय से चल रहे एक केस में दिया है। हलफनामे के अनुसार प्रदेश सरकार को जून और जुलाई में टीचरों की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी है।
इसके बावजूद सूबे के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गेस्ट टीचरों को हौसला रखने की सलाह दी है। साथ ही कहा है कि उनका रोजगार बचाने का प्रयास किया जाएगा। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में सीएम ने कहा कि अभी हाईकोर्ट में जवाब देने के लिए सरकार के पास दो हफ्तों का समय है।
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इसलिए गेस्ट टीचर सब्र करें, सरकार कोई न कोई सकारात्मक विकल्प निकालेगी, जिससे हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो जाए और गेस्ट टीचर भी बेरोजगार न हों। उन्होंने कहा कि सरकार किसी को भी बेरोजगार करने के पेक्ष में नहीं है।
विज बोले, पूर्व सरकार है इसकी जिम्मेदार
स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने कहा कि भाजपा सरकार रोजगार देने का काम करती है, रोजगार छीनने का नहीं। गेस्ट टीचरों का विवाद पूर्व हुड्डा सरकार के कार्यकाल की देन है। उनके अनुसार हुड्डा ने बिना पद सृजित किए गेस्ट टीचर के पर नियुक्तियां कर ली गईं।
उस भी यह तय था कि स्कूलों में पक्के टीचर आने के बाद गेस्ट टीचरों को हटा दिया जाएगा। आज जो हालात बने हैं, उसके लिए हुड्डा सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कानून के तहत काम कर रही है। सरकार की कोशिश है कि कोई बेरोजगार न हो। अभी सरकार के पास 15 दिन हैं। उम्मीद है सबकुछ ठीक होगा।
गेस्ट टीचर तनाव और आक्रोश में सरकारी स्कूलों से हटाए जाने के सरकारी हलफनामे के बाद से गेस्ट टीचरों में रोष है। इसके साथ ही वह रोजगार छिनने के तनाव में भी हैं। गेस्ट टीचरों का कहना है कि उनमें से अधिकांश की उम्र इतनी अधिक हो चुकी है कि वह अन्य जगह नौकरी के लिए आवेदन भी नहीं कर सकते। इसलिए सरकार को उनका रोजगार बचाने का विकल्प तलाशना चाहिए।
नौकरी दो, नहीं तो करेंगे धर्मांतरण
नौकरी बचाने के लिए करनाल में पांच दिन से महापड़ाव डाले प्रदेशभर के अतिथि अध्यापकों ने अब धर्मांतरण की चेतावनी दी है। अतिथि अध्यापकों ने चेताया है कि अगर उनकी नौकरी गई तो वे धर्म परिवर्तन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। उन्हें जहां मान-सम्मान व भर पेट रोटी मिलेगी, उसी धर्म को स्वीकार कर लेंगे।
महापड़ाव का सरकार पर कोई असर न होते देख अतिथि अध्यापक संघ ने संतों में भी पैठ बढ़ानी शुरू कर दी है। इसके पीछे तर्क है कि सरकार किसी की बात मान सकती है तो वो साधु और संत हैं। उधर धर्मांतरण की जानकारी मिलने पर मंगलवार को हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवा ठाकुर और स्वामी युगल किशोर भी धरनास्थल पर पहुंचे।
लगातार पांच दिन धरना देने के बावजूद सरकार पर कोई असर नहीं होने के कारण अतिथि अध्यापक संघ महिला विंग की प्रदेशाध्यक्ष पुष्पा ने चेताया कि अगर उनकी नौकरी छीनी गई तो वे धर्मांतरण करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उधर, इसकी भनक लगने पर हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवा सिंह ठाकुर अपने समर्थकों के साथ धरनास्थल पर पहुंच गई।
ठाकुर ने मंच से सरकार पर हमला बोला और अतिथि अध्यापकों से अपील की कि वे धर्मांतरण न करें और न ही इसके बारे में सोचें, क्योंकि हम जो जन्म से हैं, वही रहना चाहिए। ठाकुर ने महासभा की तरफ से संघ को अपना समर्थन देते हुए आंदोलन में साथ देने का वादा किया।
ठाकुर ने कहा कि हम घर वापसी की बात कह रहे हैं और समाज के प्रबुद्ध लोग अध्यापक मजबूरीवश धर्म परिवर्तन की बात कह रहे हैं, यह न सरकार के लिए ठीक है और न ही इस देश के लिए। स्वामी युगल किशोर भी धरनास्थल पर पहुंचे और अध्यापकों को समर्थन देते हुए सरकार से भी अपील की कि उनकी नौकरी बचाई जाए।
देवा सिंह ठाकुर ने मंच से कहा कि इस मुख्यमंत्री खट्टर से तो पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला अच्छे हैं, जो अध्यापकों को रोजगार देने के मामले में जेल काट रहे हैं। सरकार गेस्ट टीचर्स पर अत्याचार कर रही है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि सीएम मनोहर लाल खट्टर 20 मई को महाराणा प्रताप की जयंती पर सेक्टर 12 ग्राउंड में आ रहे हैं, यहीं पर उनका घेराव करें।
मुझे जानकारी मिली थी कि कुछ अतिथि अध्यापक नौकरी के मामले को लेकर धर्मांतरण की फिराक में हैं। धर्म परिवर्तन को रोकने और अपना समर्थन देने के लिए मैं गेस्ट टीचर्स के बीच गई थी। सरकार को इनकी रोजी रोटी के बारे में सोचना चाहिए। - देवा सिंह ठाकुर, हिंदू महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
धर्मांतरण नहीं करेंगे तो और क्या करेंगे? हिंदू और राष्ट्रवाद का झंडा बुलंद करने वाली पार्टी ही हमारे को इसके लिए मजबूर कर रही है। अगर नौकरी से हटाए तो परिवारों के साथ दूसरे धर्म को अपना लेंगे। जो धर्म नौकरी नहीं दे सकता, उसमें रहकर क्या करना? - पुष्पा, प्रदेशाध्यक्ष, महिला विंग, अतिथि अध्यापक संघ
क्या है मामला प्रदेश के 4073 गेस्ट टीचर को सरप्लस बताते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इन्हें हटाने के निर्देश दे रखे हैं, लेकिन सरकार नई भर्ती होने तक इन्हें बनाए रखना चाहती है। इसी मामले को लेकर कोर्ट सरकार को अवमानना की कार्रवाई का नोटिस जारी कर चुकी है। इस संबंध में 11 मई को भी सरकार ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा और कहा कि 27 मई तक सभी गेस्ट टीचर को हटा दिया जाएगा। सरकार के निर्णय के खिलाफ गेस्ट टीचर पिछले पांच दिन से करनाल में डेरा डाले हुए हैं।