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मेधावी छात्र सम्मान: मनोहर लाल बोले- किसी भी मंजिल पर संतोष न करें, हर बार नई मंजिलें तय करें, आगे बढ़ते चलें

Wed, 16 Aug 2023 10:51 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मनोहर लाल ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा की मेरिट सूची में स्थान पाने वाले प्रदेशभर के 118 मेधावी छात्रों को मेडल पहनाकर और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।
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हरियाणा सीएम मनोहर लाल और विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगे बढ़ने की कोई सीमा नहीं है। कोई एक मंजिल मिलने पर उसमें संतोष मत करो। ये तो सफलता की मात्र एक सीढ़ी है। हर बार नई मंजिलें तय करें और आगे बढ़ते चलतें। जिंदगी में कभी निराश नहीं होना है, क्योंकि आगे बढ़ने के रास्ते बहुत हैं। जिंदगी में ठान लें कि जो करना है विशेष करना है, अच्छा करना और समाज हित में करना है, तभी आप समाज के लिए अच्छा कर पाएंगे।

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ये उद्गार हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के। मुख्यमंत्री ने बुधवार को पंचकूला में आयोजित अमर उजाला मेधावी छात्र सम्मान समारोह में अपने मन की बात की और विद्यार्थियों से सीधा संवाद किया। संवाद का यह सिलसिला एक घंटे से अधिक समय तक चला। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के मन की बात जानी और विद्यार्थियों ने भी दिल खोलकर उनसे सवाल किए। 

कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मनोहर लाल ने हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा की मेरिट सूची में स्थान पाने वाले प्रदेशभर के 118 मेधावी छात्रों को मेडल पहनाकर और प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। अमर उजाला की ओर से भी इन मेधावियों को उपहार दिए गए। सम्मान पाकर विद्यार्थियों और उनके परिजनों के चेहरे खिल उठे। तालियों की गड़गड़ाहट से सभागार गूंज उठा।

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विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कॅरियर बनाना कोई मंजिल नहीं होती, आईएएस और आईपीएस बनना कोई मंजिल नहीं है। असली मंजिल वो होती है कि हम समाज को देते क्या हैं। अभी आप शिक्षार्थ आइए के चरण में हैं, जिस दिन आप सेवार्थ जाइए के लिए निकलेंगे, उसी दिन आपके जीवन का लक्ष्य तय होगा, क्योंकि उसी दिन से आपकी शिक्षा का असर समाज पर पड़ना शुरू होगा और वही रास्ता आपकी मंजिल तय करेगा।

आगे बढ़ने के लिए सीएम ने दीं पांच सीख

शिक्षार्थ आइए... सेवार्थ जाइए: शिक्षा के लिए आइए और सेवार्थ की भावना लेकर निकलें। शिक्षा का असली मकसद सेवार्थ ही है। कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता। सेवार्थ ही असली रास्ता तय करता है।

व्यावहारिक परिश्रम ही बनाता है मेधावी: मनुष्स के पास ज्ञान है, विद्या है, वैचारिक क्षमता है। जो उसे पशु से अलग करती है। बाकी समानाताएं तो पशु व मनुष्य की एक जैसी ही हैं।

मैं नहीं, कहें पहले आप: जब आप पहले मैं, पहले मैं कहते हैं तो आपके नंबर दूसरे से पहले ही कुछ कम हो जाते हैं, इसलिए जब भी कोई ऐसा मौका आए तो हमेशा कहें कि पहले आप। मुझे करना है: मुझे ये करना है... अगर इस सोच के साथ आगे बढ़ते रहेंगे तो वह काम खुद से हो जाएगा। मेहनत करने से सारी सफलताएं मिल जाएंगे। कभी निराश नहीं होना: मुख्यमंत्री ने कहा कि स्काई इज द लिमिट। निराश नहीं होना चाहिए। आगे बढ़ने की कोई सीमा नहीं होती।
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