विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए मनोहर लाल ने कहा कि कॅरियर बनाना कोई मंजिल नहीं होती, आईएएस और आईपीएस बनना कोई मंजिल नहीं है। असली मंजिल वो होती है कि हम समाज को देते क्या हैं। अभी आप शिक्षार्थ आइए के चरण में हैं, जिस दिन आप सेवार्थ जाइए के लिए निकलेंगे, उसी दिन आपके जीवन का लक्ष्य तय होगा, क्योंकि उसी दिन से आपकी शिक्षा का असर समाज पर पड़ना शुरू होगा और वही रास्ता आपकी मंजिल तय करेगा।
आगे बढ़ने के लिए सीएम ने दीं पांच सीख
शिक्षार्थ आइए... सेवार्थ जाइए: शिक्षा के लिए आइए और सेवार्थ की भावना लेकर निकलें। शिक्षा का असली मकसद सेवार्थ ही है। कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता। सेवार्थ ही असली रास्ता तय करता है।
व्यावहारिक परिश्रम ही बनाता है मेधावी: मनुष्स के पास ज्ञान है, विद्या है, वैचारिक क्षमता है। जो उसे पशु से अलग करती है। बाकी समानाताएं तो पशु व मनुष्य की एक जैसी ही हैं।
मैं नहीं, कहें पहले आप: जब आप पहले मैं, पहले मैं कहते हैं तो आपके नंबर दूसरे से पहले ही कुछ कम हो जाते हैं, इसलिए जब भी कोई ऐसा मौका आए तो हमेशा कहें कि पहले आप। मुझे करना है: मुझे ये करना है... अगर इस सोच के साथ आगे बढ़ते रहेंगे तो वह काम खुद से हो जाएगा। मेहनत करने से सारी सफलताएं मिल जाएंगे। कभी निराश नहीं होना: मुख्यमंत्री ने कहा कि स्काई इज द लिमिट। निराश नहीं होना चाहिए। आगे बढ़ने की कोई सीमा नहीं होती।