अब जब कैबिनेट का विस्तार हुआ है, तो कुल 14 में से सीएम समेत भाजपा कोटे से 9 मंत्री बने हैं, जजपा कोटे से डिप्टी सीएम समेत अभी तक 2 और निर्दलीय कोटे से 1 ही मंत्री बना है। दो मंत्री बनने अभी शेष है। कयास तो यही लगाए जा रहे हैं कि ये दोनों मंत्री भी जजपा कोटे से ही बनेंगे।
मगर सूत्रों की यदि माने तो कैबिनेट निर्माण के इस फार्मूले से निर्दलीय पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। पिछले दिनों उन्होंने दिल्ली और फिर चंडीगढ़ में बैठक कर प्रेशर गेम की कोशिश भी की थी। ऐसे में अभी बनने वाले दो मंत्री किस कोटे से होंगे, ये अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
उधर, कैबिनेट विस्तार यदि देंखे तो भाजपा पृष्ठभूमि के वे पांचों असंतुष्ट विधायक जो टिकट न मिलने से खफा होकर निर्दलीय लड़े और जीतने के बाद बिना शर्त भाजपा को समर्थन भी दिया। वे पांचों कैबिनेट में जगह बनाने में कामयाब नहीं हो पाए। इनमें से दो विधायक मंत्रिपद की मांग लगातार कर रहे थे। मगर सरकार ने कांग्रेस से टिकट न मिलने से खफा होकर आजाद लड़ने वाले विधायक रणजीत सिंह चौटाला पर भरोसा जताते हुए उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया।
ऐसे में अब सरकार के लिए चुनौती है कि वह ‘अपने’ इन पांचों निर्दलीय विधायकों को किस तरह से साधकर रखती है। सूत्रों की माने तो सरकार इन विधायकों को बोर्ड व निगमों में चेयरमैन पद दिए जा सकते हैं। बहरहाल, अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल को अपनी कैबिनेट में पूरी तरह सामंजस्य बिठाते हुए अपने सभी सहयोगी विधायकों को एक साथ लेकर आगे बढ़ना होगा, ताकि मनोहर टू की यह पारी भी ‘नॉटआउट’ रहकर पूरी खेली जा सके।
कैबिनेट में चौटाला परिवार का दबदबा
विधानसभा चुनाव में पहली बार ऐसा हुआ है कि चौटाला कुनबे के पांच लोग विधायक बनें हैं। इनमें रणजीत सिंह चौटाला, भतीजे अभय चौटाला व अमित सिहाग, भतीजे अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला व पौत्र दुष्यंत चौटाला शामिल हैं। अब जब कैबिनेट विस्तार हुआ है, तो उसमें भी इसी परिवार से दो लोगों को कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा मिला है।
जजपा कोटे से दुष्यंत चौटाला डिप्टी सीएम बनें, तो पूर्व मंत्री रणजीत सिंह चौटाला का भी 32 साल का सूखा खत्म हुआ है। 1987 के बाद रणजीत एक बार फिर से मंत्री बने हैं। हालांकि रणजीत और दुष्यंत की सियासी राहें जुदा हैं, मगर फिलहाल दोनों टीम मनोहर का हिस्सा हैं।