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कैबिनेट के फैसलेः अब अपने स्तर पर DGP नियुक्त कर सकेगी सरकार, प्लॉट ट्रांसफर की फीस भी घटी

Sat, 22 Dec 2018 09:34 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा कैबिनेट की मीटिंग
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हरियाणा सरकार अब अपने स्तर पर डीजीपी की नियुक्ति कर सकेगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में हरियाणा पुलिस एक्ट में संशोधन को मंजूरी देने के साथ ही इसका रास्ता साफ हो गया। अब केंद्रीय लोक सेवा आयोग को डीजीपी की नियुक्ति के लिए डीजीपी के नामों का पैनल नहीं भेजना होगा। पुलिस एक्ट में संशोधन के बाद अब सरकार एक आयोग का गठन करेगी। इसके अध्यक्ष सीएम होंगे, जबकि मुख्य सचिव, गृह सचिव, नेता प्रतिपक्ष, हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज व महाधिवक्ता सदस्य रहेंगे। 

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ये मिलकर डीजीपी का चयन और कार्यकाल का निर्धारण करेंगे। बीते छह माह से सरकार को डीजीपी के चयन में दिक्कत आ रही थी। इससे पहले सरकार की ओर से मनमर्जी के अधिकारियों का पैनल अपनी सहूलियत के हिसाब से केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाता था। जिस नाम की सिफारिश सरकार करती थी, उस पर ही मुहर लगाई जाती है। मगर, जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों के मद्देनजर कड़ा कदम उठाते हुए जहां कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त न करने के आदेश दिए थे, वहीं उचित नामों का पैनल यूपीएससी को भेजने के लिए कहा था।

 जिनमें से यूपीएससी तीन सबसे उपयुक्त आईपीएस का नाम छंटनी कर सरकार को भेजेगी। इनमें से किसी एक को ही सरकार डीजीपी बना सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा था कि उन्हीं आईपीएस के नाम डीजीपी के लिए भेजे जाएं, जिनका पर्याप्त कार्यकाल बचा हो। राज्यों ने अगर कोई कानून डीजीपी की नियुक्ति के लिए बनाया है तो उसे स्थगित रखा जाएगा। 

रिहायशी प्लॉटों की कामर्शियल ट्रांसफर फीस 50 फीसदी घटी
 हरियाणा सरकार की ट्रांसफर फीस जमा करवाकर रिहायशी प्लॉटों का इस्तेमाल वाणिज्यिक रूप से करने संबंधी योजना के प्रति लोगों का खास रुझान नहीं दिख रहा है। इसके चलते न केवल सरकार को राजस्व नुकसान हो रहा है, बल्कि रिहायशी प्लॉटों पर अवैध रूप से कामर्शियल गतिविधियां भी बदस्तूर जारी है।
इसी के मद्देनजर अब हरियाणा सरकार ने अपनी इस योजना के अंतर्गत प्लॉट धारकों को और छूट देने का निर्णय लिया है। 

सरकार ने इसके अंतर्गत अब रिहायशी प्लॉटों की कामर्शियल ट्रांसफर फीस को 50 फीसदी तक कम कर दिया है। यानी अब आधी ट्रांसफर फीस जमा करवाकर लोग अपने रिहायशी प्लॉटों को कामर्शियल प्लॉट में तब्दील कर वहां अपनी व्यावसायिक गतिविधियां चला सकते हैं। कैबिनेट ने वाणिज्यिक उपयोग के लिए आवासीय भूखंडों के रूपांतरण और नगरपालिका सीमा के भीतर पुनर्वास, नगर आयोजना एवं सुधार न्यास योजनाओं में ऐसे अवैध रूपांतरणों के नियमितीकरण के लिए नीति मानकों में संशोधन करने को मंजूरी दी गई। 
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अब ये होगी ट्रांसफर फीस, 3 महीने में करवाना होगा ट्रांसफर

- संशोधन के तहत, नगर निगम गुरुग्राम और फरीदाबाद के लिए मौजूदा भवनों के नियमितीकरण के लिए रूपांतरण फीस को 15,325 रुपये प्रति वर्ग मीटर से घटाकर 7,662 रुपये प्रति वर्ग मीटर और नए रूपांतरणों के लिए 14,000 रुपये से घटाकर 7000 रुपये प्रति वर्ग मीटर निर्धारित की गई है।

- अन्य नगर निगम क्षेत्रों में, मौजूदा भवनों के नियमितीकरण के लिए रूपांतरण शुल्क या फीस को 12,180 रुपये प्रति वर्ग मीटर से घटाकर 6090 रुपये और नयों के लिए 11,000 रुपये से घटाकर 5,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक किया गया है।

- नगर परिषद क्षेत्रों में मौजूदा भवन के नियमितीकरण के लिए प्रति वर्ग मीटर के शुल्क या फीस को 10,608 रुपये से घटाकर 5304 रुपये तक और नए के लिए 9000 से घटाकर 4500 रुपये तक किया गया है।

- नगर पालिका क्षेत्रों में, मौजूदा भवन के नियमितीकरण के लिए प्रति वर्ग मीटर के शुल्क या फीस को 9316 रुपये से घटाकर 4658 रुपये तक और नयों के लिए 8000 रुपये से घटाकर 4000 रुपये तक कम किया गया है।

-  समय सीमा में आदेश जारी करने की तिथि से तीन महीने का विस्तार प्रदान करने निर्णय भी लिया गया है, ताकि लोग नीति के तहत रूपांतरण व नियमितीकरण के लिए आवेदन कर सके।
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