कांग्रेस यहां से लगातार चौथी बार जीत दर्ज करना चाहती थी, ताकि उसका गढ़ बरोदा बचा रहे। इसके लिए ही पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा व उनके बेटे राज्यसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा ने पूरा जोर लगा दिया था। वहीं बरोदा से भाजपा पहली बार जीत दर्ज कर इतिहास रचना चाहती थी। इसके लिए सरकार के सभी मंत्रियों के साथ ही सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला तक प्रचार में जुटे थे।
योगेश्वर को हराकर जीते थे श्रीकृष्ण हुड्डा, उनके निधन के बाद हुआ उपचुनाव
बरोदा जहां पहले इनेलो का गढ़ होता था, वहीं वर्ष 2009 से लगातार कांग्रेस ने कब्जा जमाया हुआ है। बरोदा को पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा के कारण कांग्रेस का गढ़ माना जाता है और बरोदा से कांग्रेस के श्रीकृष्ण हुड्डा विधायक थे।
श्रीकृष्ण हुड्डा ने योगेश्वर दत्त को वर्ष 2019 में 4840 वोटों से हराया था। श्रीकृष्ण हुड्डा का बीमारी के कारण निधन हुआ तो बरोदा में उपचुनाव कराया गया। इस बार भी योगेश्वर नहीं जीत सके और उनको कांग्रेस प्रत्याशी से लगातार दूसरी बार हार मिली।
बरोदा में विकास कराना प्राथमिकता
अब हलके में विकास कार्य कराना प्राथमिकता है। बरोदा में उम्मीद से ज्यादा विकास कार्य कराने का प्रयास करेंगे, हालांकि सरकार पर चुनाव से पहले की घोषणाओं पर काम शुरू कराने का विश्वास नहीं है। - इंदुराज नरवाल, नवनिर्वाचित कांग्रेस विधायक
हम जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे
हमारे अंदर ही शायद कुछ कमी होगी, जो हम जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। जनता ने जिस तरह का फैसला दिया है, वह उनको मंजूर है। आखिर किस जगह कमी रही है, यह देखा जाएगा। - योगेश्वर दत्त, भाजपा प्रत्याशी
कांग्रेस ने विकास पर जीता चुनाव
बरोदा की जनता किसी के प्रलोभन में नहीं आई। कांग्रेस के उम्मीदवार ने विकास पर चुनाव जीता है। जनता ने कांग्रेस कार्यकाल के 10 साल के कामों पर मुहर लगाई है। - भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष