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Haryana Budget: फरवरी में पेश होगा हरियाणा का बजट, नहीं होंगी बड़ी घोषणाएं, जानें वजह

Tue, 09 Jan 2024 09:14 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

फरवरी महीने में हरियाणा का बजट पेश होगा। मगर कोई बड़ी घोषणा नहीं होगी। वजह यह है कि इस बार बजट अंतरिम होगा। अंतरिम बजट में खर्च का प्रावधान किया जाता है। इसे वोट ऑन अकाउंट यानी लेखानुदान कहा जाता है।  
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Haryana Budget 2024: - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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फरवरी महीने में हरियाणा का बजट पेश किया जाएगा। हालांकि, चुनावी साल होने के चलते यह आम बजट नहीं होगा बल्कि अंतरिम बजट या वोट ऑन अकाउंट बजट होगा। इसमें सरकार कोई बड़ी नीतिगत घोषणा नहीं कर सकेगी। बजट को लेकर वित्त विभाग तैयारियों में जुट गया है। वित्त विभाग पहले ही से सभी विभागों से खर्च और संभावित योजनाओं को लेकर डाटा ले चुका है। अब वित्त विभाग के एसीएस अनुराग रस्तोगी विभागों के साथ एक-एक करके बैठक करेंगे। बुधवार से पहली बैठक कृषि विभाग के साथ होगी। स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग समेत तमाम विभागों का शेड्यूल कर लिया है।

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आखिरी बार आम बजट फरवरी 2023 में पेश हुआ था। मार्च में यह वित्त वर्ष समाप्त हो जाएगा। इसके बाद अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो जाएगा। हरियाणा में अक्तूबर माह में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। नई सरकार के गठन के बाद ही आम बजट पेश किया जाएगा। इससे पहले वोट ऑन अकाउंट बजट के तौर पर निवर्तमान सरकार की जगह नई सरकार का गठन होने तक के अंतराल में प्रदेश की व्यवस्था किस तरह से चलेगी, कर्मचारियों की सैलरी के लिए फंड कहां से आएगा, चल रही परियोजनाओं के लिए पैसे कैसे आएंगे आदि को लेकर इन समस्याओं को दूर करने के लिए अंतरिम बजट पेश किया जाता है। 

अंतरिम बजट में खर्च का जो प्रावधान किया जाता है, उसे वोट ऑन अकाउंट यानी लेखानुदान कहा जाता है। वित्त विभाग पहले से ही विभागों से खर्च और आय का ब्योरा ले चुका है। अब वित्त विभाग संबंधित विभागों के साथ वन टू वन बैठक करेगा और इसके बाद उपलब्ध राशि के अनुसार बजट किया जाएगा। पूरा डाटा तैयार करके वित्त मंत्री व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को दिया जाएगा। इसके बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।

कर्ज को लेकर आमने-सामने है विपक्ष

हरियाणा पर कर्ज के आंकड़ों को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने होते रहे हैं। कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा का दावा है कि 2014 में प्रदेश पर सिर्फ 61 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, मुख्यमंत्री लगातार इस पर पलटवार करते रहे हैं। उनका कहना है कि 2014 में जब भाजपा ने सरकार संभाली तो प्रदेश पर 98 हजार करोड़ रुपये का ऋण था, जबकि विपक्ष 61 हजार करोड़ रुपये बताता आ रहा है।

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