मिशन 2024 अभियान में जुटी भाजपा ने हरियाणा में तीन लोकसभा क्षेत्रों के लिए विशेष मास्टर प्लान तैयार किया है। फीडबैक और आंतरिक सर्वे में पार्टी को सोनीपत, रोहतक और सिरसा में आगामी चुनावों में कांटे की टक्कर की संकेत मिले हैं। इन तीनों सीटों पर पिछले चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी। मगर मौजूदा हालात के बाद पार्टी कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती। भाजपा ने इन सीटों के लिए विशेष तैयारी शुरू कर दी है।
पार्टी ने तीनों लोकसभा क्षेत्र में केंद्रीय मंत्रियों के रात्रि प्रवास रखे हैं, जो तीन दिन तक वहीं रुकेंगे। इस दौरान वह स्थानीय सांसदों के साथ मिलकर प्रबुद्ध लोगों से मुलाकात करेंगे और केंद्र की नीतियों से अवगत कराएंगे। हालांकि पार्टी ने इन मंत्रियों के नामों का खुलासा नहीं किया है। तीनों लोकसभा के अंतर्गत आने वाली 27 विधानसभाओं पर भी पार्टी ने विशेष कार्यक्रम चलाए जाने की योजना बनाई है।
ढाई महीने पहले अमित शाह ने सिरसा से ही मजबूत रैली कर चुनावों की तैयारियों का आगाज किया था। वहीं, पिछले महीने मुख्यमंत्री मनोहरलाल भी सोनीपत व रोहतक में दो दिन रुके थे। इस दौरान उन्होंने दोनों जिलों के लिए लाखों रुपये के प्रोजेक्ट सौंपे थे। वहीं, प्रदेश की अन्य लोकसभा क्षेत्रों में पार्टी मानकर चल रही है कि वह मजबूत स्थिति में है।
सिरसा : दो साल पहले भाजपा हारी थी उपचुनाव
भाजपा की सुनीता दुग्गला इस सीट पर साल 2019 में तीन लाख से ज्यादा वोटों से जीती थीं। इस लोकसभा में नौ विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से सिर्फ दो सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। सिरसा की पांच विधानसभा सीटों में एक भी भाजपा के खाते में नहीं है। वहीं, 2021 में ऐलनाबाद उपचुनाव में भी भाजपा को हार का भी सामना करना पड़ा था। किसी जमाने में यह सीट चौटाला परिवार की गढ़ थी।
हालांकि रानिया विधानसभा से निर्दलीय विधायक और ओमप्रकाश चौटाला के छोटे भाई रणजीत सिंह चौटाला ने बीजेपी को समर्थन दिया हुआ है। एक दिन पहले वह अमित शाह से भी मिलकर आए हैं। वहीं, सिरसा से निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा भी भाजपा के साथ हैं। इसके बावजूद भाजपा मानकर चल रही है कि आगामी चुनावों में उसे कड़ी चुनौती मिल सकती है। इसमें करीब18 लाख वोटर हैं, जिनमें करीब साढ़े सात लाख एससी वोटर हैं। इस सीट पर दूसरी बड़ी आबादी जाटों की है। करीब तीन लाख जाट वोटर हैं और जट सिख भी करीब पौने दो लाख हैं। हालांकि इस क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा का भी एक फैक्टर है।
रोहतक : पिछले चुनाव में जीत का अंतर कम था
जाट बाहुल्य रोहतक लोकसभा की सीट हुड्डा परिवार की गढ़ मानी जाती है। इस सीट पर हुड्डा परिवार नौ बार चुनाव जीत चुका है। चार बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा यहां से जीते हैं, वहीं तीन बार दीपेंद्र हुड्डा चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन उनके विजयी रथ को भाजपा सांसद अरविंद शर्मा ने रोक दिया था। हालांकि उन्होंने यह जीत मात्र 7503 वोटों से हासिल की थी। दीपेंद्र यहां से मजबूत प्रत्याशी माने जाते हैं। साल 2014 में मोदी लहर के बावजूद वह अपनी सीट निकालने में कामयाब रहे थे। पिछले चुनाव में जीत के अंतर को देखते हुए भाजपा इस बार भी मान रही है कि उसे कड़ी चुनौती मिल सकती है। इस सीट पर करीब सवा 6 लाख जाट वोटर, 2 लाख 98 हजार अनुसूचित जाति के वोटर, करीब 1 लाख 70 हजार यादव वोटर, करीब 1 लाख 24 हजार ब्राह्मण वोटर और करीब 1 लाख 8 हजार पंजाबी वोटर हैं।
सोनीपत : जाट वोटरों को लुभाने में जुटी भाजपा
जाटलैंड के प्रभाव वाली सोनीपत हरियाणा की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण सीट है। इस सीट पर भाजपा के सांसद रमेश कौशिक पिछले दो बार से सांसद हैं। पिछली बार उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को 1.64 लाख वोटों से हराया था, लेकिन साल 2020 में बरोदा उपचुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। एक दशक से भाजपा का कब्जा होने से पार्टी यह भी मानकर चल रही है कि थोड़ी बहुत सत्ता विरोधी लहर हो सकती है। वहीं, इस सीट पर जाट वोटरों की संख्या करीब साढ़े पांच लाख है और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या भी करीब दो लाख है। जाट वोटरों को लुभाने के लिए भाजपा काफी मेहनत कर रही है। जुलाई में सीएम मनोहर लाल ने खरखौदा में दहिया खाप के दादा कुशल सिंह और ब्रिगेडियर होशियार सिंह की प्रतिमाओं का अनावरण किया था। साथ ही उन्होंने दहिया खाप के कामकाज की काफी सराहना की थी। दहिया खाप क्षेत्र की दूसरी सबसे बड़ी खाप माना जाता है।