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हरियाणा विधानसभा: विधायकों ने खोला बेलगाम अफसरों का कच्चा चिट्ठा, एटीआर पर उठे सवाल

Thu, 23 Jan 2020 10:31 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा विधानसभा में मौजूद विधायक - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा विधानसभा में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने संसदीय कार्यप्रणाली को जानने के साथ ही अपने मन की बात भी रखी। विधायकों ने बेलगाम अफसरों का कच्चा चिट्ठा लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों के समक्ष खोला और उन पर कार्रवाई करने के प्रावधान जाने। जैसे ही लोक लेखा समिति (पीएसी) और लोक उपक्रम समिति (कोपू) की बात चली तो इनके अलावा अन्य समितियों के चेयरमैन व सदस्यों ने सवाल उठाए कि सरकारी विभाग टिप्पणियों और सिफारिशों पर कार्रवाई नहीं करते, न ही एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी जाती है।
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इस पर लोकसभा सचिवालय निदेशक जया कुमार टी व स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि अगर महीने में संबंधित विभाग के अधिकारी एक्शन टेकन रिपोर्ट न दें तो उन्हें नोटिस देकर फिर बुलाया जा सकता है। इस पर संबंधित विभाग के मंत्री को विधानसभा में जवाब भी देना होगा कि कोपू व पीएसी की रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं की। समिति को जानकारी क्यों नहीं दी गई। हिसार से भाजपा विधायक डॉ. कमल गुप्ता ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंत्री सदन में जवाब देंगे तो उनसे प्रश्न कमेटी पूछेगी या विधायक। जिस पर उन्हें विधानसभा स्पीकर ने बताया कि विधायक ही पूछेंगे।

जया कुमार टी ने कहा कि बावजूद इसके कार्रवाई रिपोर्ट न देने पर समिति चेयरमैन, अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव ला सकते हैं। विधानसभा नियमों में इसका प्रावधान है। समिति चेयरमैन रिपोर्ट न देने पर प्रिवलेज समिति को अपनी शिकायत दें। ये समिति सदन को अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करेगी। जिस पर सदन निर्णय लेगा कि विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव के तहत अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करनी है।
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इन विधायकों ने कार्यक्रम के दौरान पूछे सवाल

. अंबाला शहर से भाजपा विधायक असीम गोयल ने लोकसभा सचिवालय के अधिकारियों से पूछा कि राजस्थान में सहकारी समितियों का लेखा-जोखा भी कोपू जांच सकती है। क्या हरियाणा में ऐसा करने का अधिकार स्पीकर को है। इस पर सचिवालय अधिकारी जया कुमार टी ने बताया कि नियमों में संशोधन करना पड़ेगा। राजस्थान में कंपनी एक्ट के तहत पंजीकृत समितियां ही कोपू के अंतर्गत आती हैं।

. रोहतक से कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने कहा कि विधानसभा समितियों की रिपोर्ट सदन में तुरंत लाकर पास करा ली जाती हैं। समितियां गठित करने के नियम वर्षों पहले बने हैं, उनमें बदलाव किया जाए। कमेटियों को सहयोग न करने वाले अफसरों का कार्रवाई की शक्तियां मिलें।

. गोहाना से कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक ने पूछा कि जब कोई अफसर कमेटी की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दे तो क्या करें। स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि अफसर के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाएं। कमेटी को कार्रवाई का अधिकार नहीं, सिर्फ रिपोर्ट देने का है।

. कांग्रेस विधायक शमशेर सिंह गोगी, बीएल सैनी व जजपा विधायक ईश्वर सिंह ने खुद से संबंधित शिकायतें करने को लेकर सवाल पूछा। इस पर लोकसभा सचिवालय अधिकारी जया कुमार ने बताया कि वे पिटीशन कमेटी के पास अपनी शिकायत करें।

. कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और नीरज शर्मा ने डीसी व अन्य अफसरों के सम्मान न देने का मुद्दा उठाया व पूछा कि उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है। इस पर स्पीकर ने बताया कि विधायकों के सम्मान के लिए डीसी व अफसरों का सीट से उठना जरूरी है। मुख्य सचिव के निर्देशों के बावजूद अगर अफसर नहीं सम्मान दे रहे तो प्रिवलेज कमेटी में मामला उठाओ। कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। प्रिवलेज समिति विधायकों के ही मामलों की सुनवाई करती है।

. कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने राज्यपाल के अभिभाषण को पढ़ा हुआ मान लेने का मामला उठाया। इस पर स्पीकर ने कहा कि विशेष परिस्थितियों और समय के अभाव में ऐसा किया जा सकता है। पूर्व से ही नियमानुसार ऐसा चला आ रहा है। भाजपा विधायक डॉ. अभय यादव बोले कि यह राज्यपाल का अधिकार क्षेत्र है, अभिभाषण कितना पढ़ें, कितना नहीं।
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