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हरियाणा में पक रही नई सियासी खिचड़ी, बढ़ती नशाखोरी के स्थगन प्रस्ताव पर इनेलो और कांग्रेस एक

Tue, 06 Aug 2019 10:43 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में नई सियासी खिचड़ी भी पक रही है। इनेलो के वरिष्ठ विधायक अभय चौटाला यूं ही सदन में एकाएक पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सीट पर नहीं पहुंच गए थे। दोनों के बीच नजदीकियां अब रंग दिखाने लगी हैं। सोमवार को सत्र के दूसरे दिन चौटाला की ओर से बढ़ती नशाखोरी पर लाया गया स्थगन प्रस्ताव गिर जाता, अगर कांग्रेस विधायकों का सदन में साथ न मिलता। चौटाला ने जैसे ही प्रस्ताव पेश किया, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने विधानसभा की नियमावली का हवाला देते हुए उसका विरोध कर डाला।
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पंवार ने कहा कि नियमावली 67 (2) के अनुसार स्थगन प्रस्ताव चर्चा के लिए तभी मंजूर किया जा सकता है, जब 11 सदस्यों का समर्थन हो। इसमें चार ही विधायकों का समर्थन है। इस पर अभय ने कहा कि सत्ता पक्ष नशाखोरी के मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है और उनकी आवाज को दबाना चाहता है। उन्होंने कहा कि जो भी विधायक इसके समर्थन में हों वे आगे आएं। इस पर कांग्रेस की ओर से झज्जर की विधायक गीता भुक्कल ने सबसे पहले समर्थन किया। उसके अलावा करण दलाल, रघुबीर कादियान, ललित नागर, शकुंतला खटक, उदयभान, जयबीर बाल्मिकी इत्यादि खड़े हो गए।

यह देखकर जजपा समर्थक तीन विधायकों नैना सिंह चौटाला, अनूप धानक और पिरथी सिंह नंबरदार ने भी प्रस्ताव का समर्थन कर दिया। जिससे प्रस्ताव गिरने से बच गया।
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अभय चौटाला ने बकायदा, इसके लिए कांग्रेस विधायकों का धन्यवाद भी किया। अगर हुड्डा समर्थक विधायकों का साथ चौटाला को नहीं मिलता तो स्थगन प्रस्ताव गिरने से उनकी किरकिरी होती, जिससे वह बच गए। स्पीकर कंवर पाल की ओर से बढ़ती नशाखोरी पर चच्रा के लिए दो घंटे बहस कराई गई। अभय चौटाला ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसके बाद काम रोककर इस मुद्दे पर चर्चा कराई गई। प्रस्ताव पर चर्चा में इनेलो विधायक वेद नारंग, ओमप्रकाश बरवा, मक्खन लाल सिंगला व कांग्रेस विधायकों ने भी हिस्सा लिया।

2019 में मई तक 918 मामले दर्ज
अभय चौटाला ने सदन में बताया कि 2019 में जनवरी से मई माह तक 918 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 1129 गिरफ्तारियां हुई हैं। युवा वर्ग खासकर ड्रग्स की चपेट में आ रहा है। यह समस्या एक संक्रामक रोग बन चुकी है। यह गंभीर समस्या है जिसे बिना देरी सुलझाया जाना चाहिए। राज्य उस समय तक का इंतजार नहीं कर सकता जब कोई फिल्मकार उड़ता पंजाब जैसी फिल्म न बना दे। सरकार की ओर से राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने नशाखोरी रोकने और नशा तस्करों पर कार्रवाई के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। साथ ही उत्तर भारत के राज्यों द्वारा मिलकर इसके खिलाफ बनाई गई रणनीति को भी साझा किया।
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