दूसरी तरफ, निर्मल सिंह की पुत्री चित्रा सरवारा ने सबसे पहले नगर निगम अंबाला के चुनाव साल 2013 में लड़ा और पार्षद बनी थीं। इसके बाद कांग्रेस में अच्छे पद पर भी पहुंचीं। करीब दो साल से वह अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर पार्टी के लिए काम कर रही थीं।
पूर्व मंत्री चाहते थे कि उनकी बेटी राजनैतिक क्षेत्र में आगे बढ़े और खुद की बजाए बेटी को अंबाला छावनी विधानसभा से टिकट दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे। इसीलिए टिकट बंटवारा शुरू होते ही पूर्व मंत्री दिल्ली दरबार में ही अपना डेरा जमा कर बैठ गए थे। लेकिन जब पार्टी ने टिकट काटा तो विवाद खड़ा हो गया। छावनी में निर्मल समर्थकों और कुछ कांग्रेसियों ने कुमारी सैलजा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सुबह घोषणा शाम को पुतला फूंका
पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने सुबह आजाद लड़ने की घोषणा के बाद शाम को कांग्रेस भवन के सामने एकजुट होकर कुमारी सैलजा का पुतला फूंका। पूर्व मंत्री निर्मल सिंह समेत समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कई तरह के आरोप भी लगाए हैं। विरोध प्रदर्शन के बाद अब पिता-पुत्री दोनों शुक्रवार को आजाद उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र भरेंगे।
कांग्रेसियों का समीकरण बिगाड़ सकते हैं
पिता-पुत्री द्वारा बगावत करने पर अब शहर और छावनी दोनों सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी और वोटरों के लिए बड़ा संकट पैदा हो सकता है। ऐसे में इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को ही हो सकता है। शहर से कांग्रेस ने जसबीर सिंह को तो छावनी से वेणू गोपाल को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस तरह दोनों सीटों पर कांग्रेस का वोट दो खेमों में बंटने से सीधे तौर पर कांग्रेस प्रत्याशी को ही नुकसान होने की संभावना है।