मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान जब मंच से पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजनलाल का नाम लिया और कुलदीप बिश्नोई पर तंज कसा तो रैली स्थल पर मौजूद कुलदीप समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी और चौधरी भजनलाल अमर रहे, कुलदीप बिश्नोई जिंदाबाद व भाजपा सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए।
कुलदीप समर्थकों द्वारा नारेबाजी होती देख पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें पंडाल से बाहर ले गई। इस पर कुलदीप समर्थक उनके प्रतिष्ठान पर एकत्रित हो गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों की नारेबाजी सुनकर भव्य बिश्नोई प्रतिष्ठान के ऊपर बने आवास से नीचे आए और समर्थकों से जानकारी ली। भव्य बिश्नोई ने इसे भाजपा सरकार की चाल बताते हुए इसे सरकार की बौखलाहट बताया।
आदमपुर हलके की जनता को सीएम से किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं : कुलदीप बिश्नोई
लोकतंत्र में सबको रैली करने का अधिकार है, लेकिन मुख्यमंत्री को तभी अधिकार है, जब हलके में काम कराए हों। चीफ मिनिस्टर दो मकसद से आए थे, पहला बैकवर्ड भाइयों को बरगलाने के लिए और दूसरा किसी तरीके से चौ. भजनलाल परिवार से आदमपुर हलका नाता तोड़ दे। आदमपुर हलके और उसकी जनता को मुख्यमंत्री से किसी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। हमारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी और दिली रिश्ता है।
सीएम मनोहर लाल का कहना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में टिकटों के दलाल घूम रहे हैं। कुछ प्रत्याशियों को फोन करते हैं। कहते हैं कि तुझे टिकट चाहिए तो दे दे इतने लाख। यदि पैसे देगा तो तुझे टिकट दिलवा दूंगा। ऐसा करते दो फर्जी गिरोह पकड़े गए हैं। ये गिरोह सब जगहों पर एक्टिव हैं। वे बीजेपी और कांग्रेस की टिकटें दिलाने का दावा कर रहे हैं। इतना ही नहीं ऐसे लोग सब पार्टियों की टिकटें दे रहे हैं।
ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते सीएम मनोहर लाल ने कहा कि हकीकत में उनको टिकटों से कोई मतलब नहीं होता। ऐसे लोगों को लाखों रुपये लेकर अपनी जेब भरने से मतलब होता है। टिकट मिलेगी तो मिल जाएगी नहीं मिलेगी तो भी उनका कोई नुकसान नहीं है। आज युग बदला है। हमें भ्रष्टाचार को हर कीमत पर रोकना है। ऐसे दो ग्रुप पकड़े हैं। दोनों के खिलाफ केस दर्ज करवाया है।
नौकरियां दिलवाने के समय पर भी ऐसे गिरोह पकड़े थे। वे ऊपर के नेताओं से पहचान बताकर प्रत्याशियों को फोन करते थे कि आप हमें पैसे दे दीजिए आपको टिकट दिलवा देंगे। ऐसा लालच दिया जाता था। जो समझदार लोग होते हैं वे समझ जाते हैं और कुछ फंस जाते हैं। ऐसे पैसों से टिकट नहीं मिलती। ऐसे विषयों में सावधानी बरतनी होती है।