यूपी सीएम योगी के साथ हरियाणा सीएम खट्टर
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हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के सभी बड़े धुरंधर मैदान में उतर चुके हैं। पार्टी ने अपने दो मंत्रियों को छोड़कर बाकी सभी पर भरोसा जताया है। मनोहर लाल सरकार के पहले कार्यकाल में अहम विभाग संभालने वाले सभी मंत्रियों की अब जनता की अदालत में कड़ी परीक्षा होगी। इन्हें न केवल विपक्ष की घेराबंदी से बचना होगा, बल्कि जनता की नब्ज भी टटोलनी होगी। भाजपा के कुछ मंत्री दूसरी बार विधानसभा पहुंचने के लिए जोर लगाएंगे तो कुछ अपनी तीसरी या छठी पारी खेलने उतरेंगे।
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा पांच बार विधानसभा पहुंच चुके हैं, इस बार उनके पास शिक्षा मंत्री का जिम्मा था। इससे पहले भी वह मंत्री रह चुके हैं। महेंद्रगढ़ विधानसभा सीट से एक बार फिर वह मैदान में उतरेंगे। उनका पूरा फोकस एक बार फिर चुनाव जीत कर विधानसभा की दहलीज लांघने पर है। जबकि, विरोधी उनका रास्ता रोकने की पूरी कोशिश करेंगे। शर्मा को कांग्रेस के अलावा इनेलो, जजपा से भी पार पाना होगा। अंबाला के विधायक व स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज भी पांच बार विधानसभा पहुंच चुके हैं।
इस बार वह छठी पारी खेलने को बेताब हैं। विज को घेरने के लिए कांग्रेस अपना उम्मीदवार इस बार बदल सकती है। इनेलो और जजपा उम्मीदवारों से भी विज को सचेत रहना होगा। साथ ही क्षेत्र की जनता को विश्वास में लेना पड़ेगा। शहरी निकाय मंत्री तीसरी बार चुनाव मैदान में उतरने जा रही हैं। वह लगातार दो बार जीती हैं। इस बार उन्हें भी विपक्ष के चुनावी चक्रव्यूह से बचना होगा। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु व कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ पहली बार ही जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। दोनों ही इस बार भी जीत को लेकर पूरी ताकत झोंके हुए हैं।
इन्हें भी अपने-अपने हलकों में विपक्ष की रणनीति भेदनी होगी। परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार भी लगातार जीतकर विधानसभा आ रहे हैं। भाजपा से वह पहली बार ही जीते थे, इससे पहले इनेलो में जीतते रहे। उन्हें भी इस बार कांग्रेस और इनेलो के घेराबंदी से सतर्क रहना होगा। राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर, कर्ण देव कंबोज, कृष्ण बेदी, बनवारी लाल भी पहली बार ही जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इस बार इन्हें दोबारा अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। कंबोज के लिए चुनौती इसलिए भी ज्यादा है, चूंकि उनका विधानसभा क्षेत्र बदल दिया गया है।