ताऊ देवीलाल के गढ़ में इस बार साख की लड़ाई है। युवाओं की अग्निपरीक्षा है। आप और भाजपा के पंजाबी समाज के प्रत्याशी देवीलाल के लालों का चुनावी गणित बिगाड़ रहे हैं।
पंजाब और राजस्थान की सीमा पर स्थित डबवाली विधानसभा क्षेत्र में मतदाता इस बार ताऊ देवीलाल के युवराजों की अग्निपरीक्षा लेंगे। यहां इनेलो, कांग्रेस, जजपा, भाजपा और आम आदमी पार्टी समेत सभी प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशी चुनाव उतार दिए हैं।
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कांग्रेस से विधायक अमित सिहाग अपनी जीत बरकरार रखने की जंग लड़ रहे हैं, तो जजपा के दिग्विजय चौटाला और इनेलो के आदित्य देवीलाल भी अपनी पुश्तैनी सीट पर काबिज होने के लिए उत्साहित हैं।
भाजपा और आम आदमी पार्टी ने भी पंजाबी प्रत्याशियों को उतारकर ताऊ देवीलाल के युवराजों का चुनावी गणित मुश्किल कर दिया है। इस बार मतदाताओं के सामने युवा जोश और अनुभवी चेहरों में से किसी एक विकल्प को चुनने का मजबूत अवसर रहेगा।
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सबके तरकश में सबकी काट
डबवाली सीट पर इस बार चुनाव काफी पेचीदा रहने वाला है। सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के मैदान में उतर जाने के बाद यहां स्थिति कांटे की टक्कर वाली हो गई है। सियासी बिसात कुछ इस तरह बिछी है कि कांग्रेस के अमित सिहाग, इनेलो के आदित्य देवीलाल और जजपा के दिग्विजय चौटाला तीनों घिरे नजर आ रहे हैं।
कांग्रेस के अमित सिहाग पिछले चुनाव में मिली जीत और लोकसभा चुनाव में डबवाली से कांग्रेस को मिली बढ़त से उत्साहित हैं। इनके लिए सुकून देने वाली बात यह भी है कि ये हुड्डा और सैलजा दोनों ही गुट की पसंद हैं। ऐसे में भितरघात का खतरा कम है।
आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी कुलदीप गदराना और भाजपा के बलदेव सिंह मांगेआना इनकी राह मुश्किल करते दिख रहे हैं। ये दोनों ही पंजाबी समुदाय से हैं। पंजाबी समुदाय ने लोकसभा चुनाव में खुलकर कांग्रेस को वोट दिया था। इन दोनों के उतरने से पंजाबी वोट जो कांग्रेस की ताकत है, वह बंटेगा।
जजपा और इनेलो में बंटेंगे एससी वोट
विधानसभा चुनाव में जजपा ने आजाद समाज पार्टी तो इनेलो ने बहुजन समाज पार्टी से समझौता किया है। बसपा के हर जिले में कैडर वोटर हैं जो हार-जीत की परवाह किए बगैर अपने प्रत्याशी को ही वोट देते रहे हैं। हालांकि हाल के दिनों में अनुसूचित जाति के मतदाता चंद्रशेखर रावण से काफी तेजी से जुड़े हैं।
ऐसे में इस वोट बैंक के बंटने की पूरी उम्मीद है। दूसरी ओर देखा जाए तो डबवाली सीट पर शुरू से इनेलो का प्रभाव रहा है। इसके अलावा इनेलो प्रत्याशी आदित्य देवीलाल का अपना वोट बैंक भी है। इसी तरह जजपा ने भी अपने तरकश के सबसे प्रभावी तीरों में शुमार दिग्विजय को मैदान में उतार दिया है।
दिग्विजय यहां युवाओं के बीच पिछले काफी दिनों से सक्रिय हैं। इस सीट से दिग्विजय की मां नैना चौटाला और पिता अजय चौटाला भी जीतकर विधानसभा पहुंच चुके हैं। खास बात यह कि इस बार चंद्रशेखर रावण की वजह से इनको एससी वोट मिलने की भी उम्मीद है।
पर्ची-खर्ची के बिना नौकरी और संघ का प्रभाव भाजपा को दिलाएगा वोट
डबवाली के रिसालिया खेड़ा और रामगढ़ गांव में 50 से ज्यादा युवाओं को बगैर पैरवी और बिना खर्च के सरकारी नौकरी मिली है। इस गांव के युवा खुलेआम भाजपा की तारीफ करते हैं। पंजाब से सटे इस क्षेत्र में मनोहर लाल और संघ का भी प्रभाव है, जिसके वोट में बदलने की उम्मीद है। इसके अलावा भाजपा ने पंजाबी समुदाय से ही प्रत्याशी उतारा है ताकि कांग्रेस को क्षति पहुंचाई जा सके।
नशा इस बार भी सबसे बड़ा मुद्दा
पंजाब से सटे डबवाली में नशा बड़ा और वोट को प्रभावित करने वाला मुद्दा है। कांग्रेस विधायक अमित सिहाग इस मुद्दे को सदन में गंभीरता से उठाते रहे हैं। डबवाली को पुलिस जिला बनवाने और यहां नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना को सिहाग अपने प्रयास से जोड़कर देख रहे हैं, तो भाजपा भी इसे सरकार के प्रयास के रूप में गिनवाती रही है। जजपा प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला भी पिछले कुछ समय से क्षेत्र में युवाओं के बीच लगातार सक्रिय हैं और नशे के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है।
शहरी क्षेत्र की जीत में होगी अहम भूमिका
डबवाली को मुख्यत: तीन क्षेत्र बागड़ी, पंजाबी और शहरी में बांटा जाता है। राजस्थान से सटे बागड़ी बेल्ट के बड़े गांव चौटाला, आसाखेड़ा, तेजाखेड़ा में चौटाला परिवार का काफी प्रभाव है। पंजाबी क्षेत्र मसीतां वगैरह में किसान प्रभावी स्थिति में हैं। यहां की राजनीति पर पंजाब का भी असर दिखता है। शहर में कांग्रेस-भाजपा समेत तमाम दलों का प्रभाव है। शहरी क्षेत्र में करीब 60 हजार मतदाता हैं जो मुद्दों और समीकरणों को प्रभावित करेंगे। इस क्षेत्र में जट सिख और जाट मतदाता सबसे अधिक हैं।