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Haryana Ground Zero: विरासत की जंग में बदला भाजपा-कांग्रेस का मुकाबला, बंसीलाल की पोती और पोता आमने-सामने

Thu, 03 Oct 2024 12:52 PM IST
शाहरुख खान आशीष वर्मा, अमर उजाला, तोशाम

सार

भाजपा-कांग्रेस का मुकाबला बंसीलाल की विरासत की जंग में बदल गया है। भाजपा से बंसीलाल की पोती श्रुति चौधरी और कांग्रेस से उनका पोता अनिरुद्ध चौधरी मैदान में हैं। 
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haryana election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अरावली पर्वत शृंखला की तलहटी में बसे तोशाम में चुनाव एक अलग ही रंग में रंगा है। यहां भाजपा ने बंसीलाल की पोती व पूर्व सांसद श्रुति चौधरी को मैदान उतारा है। कांग्रेस ने बंसीलाल के ही पोते अनिरुद्ध चौधरी को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। 
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श्रुति को बंसीलाल की राजनीति का उत्तराधिकारी माना जाता है, मगर अनिरुद्ध खुद को बंसीलाल का वारिस बताते हैं। इससे चुनावी लड़ाई भाजपा-कांग्रेस के साथ बंसीलाल के असल राजनीतिक विरासत की जंग में बदल गई है।

श्रुति को बंसीलाल की विरासत के साथ, उनकी राज्यसभा सांसद मां किरण चौधरी, विकास कार्यों व गैर जाट वोटों का सहारा है। दूसरी ओर, अनिरुद्ध खुद को बंसीलाल का असल वारिस बता किरण के पारंपरिक वोटों में सेंध लगाते हुए सत्ता विरोधी वोटों के सहारे चंडीगढ़ पहुंचने का रास्ता बना रहे हैं। 
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मुकाबला इतना कड़ा है कि अभी इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल है कि पलड़ा किसका भारी है। तोशाम आधुनिक हरियाणा के निर्माता पूर्व सीएम चौधरी बंसीलाल की परंपरागत सीट रही है। अब तक हुए 14 विधानसभा चुनाव (उपचुनाव सहित) में दो को छोड़ हर बार बंसीलाल परिवार ने जीत हासिल की है। 

किरण लगातार चार बार से विधायक रही हैं। चारों ही चुनाव में उन्हें कोई मुश्किल नहीं आई। हर बार चुनाव एकतरफा रहा है। मगर इस बार उन्हें अपनी बेटी के लिए काफी पसीना बहाना पड़ रहा है।

 

लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की कड़वाहट के चलते वह अपनी बेटी श्रुति चौधरी के साथ कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गई हैं। भाजपा ने किरण को राज्यसभा में भेजा और श्रुति को तोशाम से टिकट दे दिया। 

 

बस यही से उनकी राह थोड़ी मुश्किल हो गई। पटौदी कलां गांव के निवासी करतार सिंह कहते हैं कि यदि श्रुति भाजपा में शामिल नहीं होती थी तो उनकी एकतरफा जीत होती। भाजपा में जाने से उनके कुछ कार्यकर्ता नाराज हैं। कार्यकर्ताओं के लिए भावनाएं बदलना इतना आसान नहीं होता। 

 

इसी गांव के अतर सिंह कहते हैं कि किरण चौधरी ने तोशाम में काफी विकास कार्य करवाए हैं। वह अकसर लोगों के बीच रहती हैं। तोशाम शहर के दुकानदार धनीराम का कहना है कि किरण ही तोशाम में कॉलेज, झील और हर्बल पार्क लेकर आई हैं, इसलिए वह इस बार भी चुनाव जीतेंगी।
 

बीसीसीआई के पदाधिकारी अनिरुद्ध का राजनीति में डेब्यू
कांग्रेस के उम्मीदवार अनिरुद्ध चौधरी का यह पहला चुनाव है। वह बीसीसीआई के पूर्व कोषाध्यक्ष रहे हैं। उनके पिता रणबीर महेंद्रा बीसीबीआई के अध्यक्ष रह चुके हैं। रणबीर कांग्रेस के टिकट पर पांच बार चुनाव लड़े, मगर जीत सिर्फ एक बार हासिल हुई है। 

 

अनिरुद्ध अपनी चुनावी रैलियों में कहते हैं कि तोशाम विकास के मामले में सूखा झेल रहा है। जैसा चौधरी बंसीलाल तोशाम को छोड़ गए थे, वो वैसा ही है। लोग अब बदलाव चाहते हैं। वह अपने दादा के नक्शे कदम पर चलकर पूरे इलाके का सामूहिक विकास करवाएंगे। तोशाम कस्बे के ही धर्मपाल कहते हैं कि यह चुनाव बदलाव को लेकर है। 
 

अनिरुद्ध नया है और बंसीलाल परिवार का है। उसे भी एक बार मौका मिलना चाहिए। तोशाम से कुछ दूरी आगे चलने पर संडवा गांव आता है, जो जाट बहुल है। इस गांव के सज्जन सिंह कहते हैं कि मुकाबला बराबरी का है। अनिरुद्ध को भी लोग पसंद कर रहे हैं। भाजपा की खिलाफत होने की वजह से अनिरुद्ध को फायदा मिल रहा है तो श्रुति को चुनौती झेलनी पड़ रही है, लेकिन श्रुति के पक्ष में काफी लोग हैं।

दूसरी बार एक-दूसरे के खिलाफ उतरे
यह दूसरी बार है जब बंसीलाल की अगली पीढ़ी के सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। 1998 में श्रुति के पिता सुरेंद्र सिंह ने अनिरुद्ध के पिता रणबीर सिंह महेंद्रा को भिवानी लोकसभा सीट से हराया था। उस समय सुरेंद्र हरियाणा विकास पार्टी से चुनाव लड़ रहे थे और रणबीर कांग्रेस के टिकट पर। अब 26 साल बाद तीसरी पीढ़ी एक दूसरे के सामने हैं।

 

श्रुति का चुनाव भाजपा के बागी पर निर्भर
भाजपा के बागी शशि रंजन परमार तोशाम से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। हाल ही उनका एक वीडियो काफी वायरल हुआ था, जिसमें पत्रकार से बातचीत करते वक्त उनकी आंखों से आंसू छलक उठे थे। भाजपा ने उनका टिकट काट श्रुति को दिया था। वह राजपूत समाज से आते हैं, जो भाजपा का पारंपरिक वोट रहा है। 
 

2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में उन्हें 54,000 से अधिक वोट मिले थे। श्रुति का चुनाव बहुत कुछ परमार के वोटों पर निर्भर करता है। यदि परमार 15 से 20 हजार भी वोट हासिल कर गए तो श्रुति के लिए मुश्किलें हो सकती हैं।

इन पांच समीकरण पर टिका पूरा चुनाव
1.श्रुति और अनिरुद्ध जाट उम्मीदवार के साथ बंसीलाल परिवार से ताल्लुक रखते हैं। बंसीलाल विरासत के वोट बंटना तय है।
2.श्रुति को अपने पारंपरिक वोटों के अलावा गैर जाट वोटों का सहारा है। जाट के बाद यहां ब्राह्मण और राजपूत की आबादी अच्छी खासी है।
3.अनिरुद्ध पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी हैं। लोगों मानते हैं कि कांग्रेस यदि सत्ता में आती है तो अनिरुद्ध इलाके के लिए काम करवा सकेंगे। विकास नहीं रुकेगा।
4.वोटरों का एक वर्ग साइलेंट है। वह हवा का रुख देख रहा है। चुनाव से पहले जिसका पलड़ा भारी होगा, यह वर्ग उसी ओर जाएगा।
5.अनिरुद्ध लोकसभा चुनाव के बाद सक्रिय हुए हैं। उनके पिता भी बाढड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं, जबकि किरण दो दशक से सक्रिय हैं।
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