हरियाणा प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए वैसे तो राज्य की हर सीट महत्वपूर्ण है लेकिन सूबे के सियासी दिग्गजों को घर में ही घेरने के लिए हर दल ने तैयारी शुरू कर दी है।
हर दिग्गज को उसके घर में घुसकर मात देने का प्रयास कर रहा है। एक तरफ सियासी सूरमा जहां अपने क्षेत्र में साख बचाने को पूरा दमखम लगाने में जुटे हैं तो विपक्षी पार्टियां सेंध लगाने को पुरजोर जोड़तोड़ की कोशिश में है।
भाजपा सहित सभी सियासी दल जहां सीएम के किले रोहतक को भेदने की तैयारी में जुटे हैं वहीं कांग्रेस भी अपने इस गढ़ को बचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला भले ही जेल में हैं लेकिन उनके कार्यकर्ता उनकी पाती लेकर मैदान में हैं। महेंद्रगढ़ में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष रामबिलास शर्मा पार्टी की बड़ी रैली कराकर अपनी मजबूती का अहसास करा चुके हैं।
उधर, हजकां-भाजपा गठबंधन टूटने और हजकां के विनोद शर्मा से हाथ मिलाने से प्रदेश में नये सियासी समीकरण भी बने हैं। राज्य में राजनीतिक हलचल में कहां, क्या चल रहा है इस पर अमर उजाला की एक रिपोर्ट।
सीएम का किला भेदने की तैयारी
प्रदेश के मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के कारण सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर रोहतक पर है। पार्टियां मुख्यमंत्री को उन्हीं के घर में घेरने की कोशिश में लगी हैं।
भाजपा इसकी शुरुआत अपने सात दिवसीय मंथन कार्यक्रम के साथ कर चुकी है। इसके अलावा भाजपा अपनी रणनीति भी पार्टी के रोहतक में स्थित प्रदेश कार्यालय से ही बना रही है।
टिकटों को लेकर भी बैठकें यहीं हो रही हैं। कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के नेताओं के भाजपा में शामिल होने के कार्यक्रम भी अधिकतर भाजपा के रोहतक स्थित प्रदेश कार्यालय पर ही किए जा रहे हैं। ताकि यहां पर पूरी पकड़ बनाई जा सके।
भाजपा कांग्रेस पर क्षेत्र में एक खास वर्ग के लोगों को ही नौकरियां देने और जनता से किए भेदभाव के आरोपों के साथ प्रदेश सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं, इनेलो ने भी कमर कसते हुए क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान छेड़ दिया है।
चौटाला गुट की नजर रोहतक पर
इनेलो नेता दुष्यंत चौटाला और अभय सिंह चौटाला की रोहतक पर खास नजर है। इनेलो अधिक से अधिक युवाओं को साथ लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर चुका है और इसी के चलते इनेलो की युवा विंग इनसो के कई कार्यक्रम सीएम के क्षेत्र में हो चुके हैं। हजकां ने भी पूर्व गृह मंत्री एंव पंजाबी नेता सुभाष बतरा को अपने साथ जोड़ पंजाबी वोटों में सेंध लगाने की तैयारी कर ली है।
चर्चा है कि कुलदीप बिश्नोई सितंबर माह में रोहतक में ही प्रदेश स्तरीय रैली भी करने की तैयारी में हैं। वहीं, कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले रोहतक क्षेत्र से तीन बार भूपेंद्र सिंह हुड्डा सांसद रह चुके हैं और दो बार से विधायक हैं। उनके पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक से लगातार तीसरी बार सांसद बने हैं।
रोहतक में वर्तमान में चारों सीटों पर कांग्रेस के विधायक होने से मुख्यमंत्री आश्वस्त हैं। हुड्डा क्षेत्र में हुए विकास कार्यों के साथ जनता के बीच पहुंच रहे हैं तो हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में रोहतक से कांग्रेस की जीत को भी जनता का आशीर्वाद मान रहे हैं। हालांकि इस बार सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को पिछले चुनाव से काफी कम अंतर से जीत मिली है। इसलिए दूसरी पार्टियां इस मौके को भुनाने की ताक में हैं।
रामबिलास को घेरने के लिए बनाई विशेष रणनीति
लगातार तीन बार से हार का सामना कर रहे भाजपा के दिग्गज नेता भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष व सीएम पद के दावेदार रामबिलास शर्मा को अपने घर में ही कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। विपक्षी दलों ने रामबिलास को घेरने के लिए बिसात बिछा दी है और अपने मोहरे मैदान में उतारने शुरू कर दिए हैं। कांग्रेस से जहां राव दान सिंह लगातार तीन जीत दर्ज चुके हैं।
इनेलो ने भी नांगल चौधरी से विधायक राव बहादुर सिंह पर बाजी लगाई है। अहीर क्षेत्र के गैर अहीर नेता रामबिलास शर्मा पिछले 15 साल से राजनीति का वनवास काट रहे हैं। बेशक, लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश में रामबिलास शर्मा का कद बढ़ा है, लेकिन उन्हें साख बचाने को इस बार जीत के लिए कड़े प्रयास करने होंगे।
हालांकि, इतिहास इस बात का गवाह है कि जब जब दो कद्दावार अहीर नेता महेंद्रगढ़ से चुनाव लड़े हैं तो बाजी रामबिलास शर्मा के हाथ लगी है। वर्ष 1982 से 1996 तक रामबिलास शर्मा लगातार चार बार यहां से विजयी रहे। इसके बाद से शर्मा यहां से विधानसभा नहीं पहुंच पाए। भाजपा ने जहां अपनी विजय संकल्प यात्राओं का शुभारंभ महेंद्रगढ़ से किया वहीं, यात्राओं के शुभारंभ से पहले रामबिलास शर्मा के घर राठीवास में हवन भी करवाया गया।
राव दान सिंह दस साल के विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच में हैं। इनेलो के राव बहादुर सिंह को कम नहीं आंका जा रहा है और अहीर मतदाताओं में उनकी अच्छी पकड़ है। उधर, गठबंधन टूटने के बाद हजकां व हरियाणा जनचेतना पार्टी भी महेंद्रगढ़ में किसी अहीर नेता पर दांव लगा सकती है। कांग्रेस व इनेलो दोनों ही दल रामबिलास को घर में ही घेरने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं।
बता दें कि महेंद्रगढ़ हलके में सबसे ज्यादा करीब 60 हजार वोटर अहीर हैं। ऐसे में अगर गैर अहीर नेता मैदान में नहीं आया तो अहीरों के वोट बंट सकते हैं। देखना यह है कि महेंद्रगढ़ किसको जीत का ताज पहनाता है। इस बार गढ़ को जीतना किसी के लिए भी इतना आसान नहीं होगा।
इनेलो के गढ़ में सब दिखा रहे ताकत
सिरसा इनेलो का गढ़ माना जाता है। लेकिन इस बार पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के गढ़ में दूसरी पार्टियां सेंध लगाने को तैयार हैं। इनेलो ने अपने चुनावी मुद्दे में महंगाई, रोजगार, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा के क्षेत्र को विशेष स्थान दिया है। इनेलो हर हाल में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है।
वहीं, भाजपा ने अपने चुनावी मुद्दे में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन शामिल किया है, इसके साथ लोगों को अच्छे दिनों के सपने भी दिखाए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने का संकल्प भाजपा के मुद्दे में विशेष स्थान पर है। हालांकि सभी वर्गों के अनुसार भाजपा ने अपने चुनावी मुद्दे को तैयार किया है पर किसान वर्ग को काफी हद तक नजरअंदाज किया है।
कांग्रेस विकास के मुद्दे को जनता के बीच लेकर जा रही है और इनेलो को गुंडागर्दी वाली पार्टी करार देकर यहां प्रचार-प्रसार में जुटी है। इसके साथ ही नंबर वन हरियाणा के श्लोगन को अपनी ढाल बनाते हुए कांग्रेस ने दस वर्षों में करवाए कार्यों की लिस्ट मुद्दे में शामिल की है। विकास ही कांग्र्रेस का मुख्य मुद्दा है।
हरियाणा जनहित पार्टी द्वारा अपने चुनावी मुद्दे में भ्रष्टाचार पर सबसे ज्यादा चोट की गई है। भ्रष्टाचार को समाप्त करना, किसानों के लिए बेहतर माहौल बनाना भी पार्टी ने अपने मुद्दे में रखा है। इसके अलावा शिक्षा, रोजगार, महंगाई को भी स्थान दिया गया है। युवा वर्ग को विशेष तरजीह अपने मुद्दे में दी गई है। भ्रष्ट नेताओं की सच्चाई जनता के सामने लाने की बात भी कही गई है।
कुलदीप बिश्नोई के माथे पर चिंता की लकीरें
पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल की सियासत का गढ़ माने जाने वाले हिसार में वर्तमान में 7 में से 4 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। जबकि दो सीटों पर आदमपुर से रेणुका बिश्नोई और हांसी से विनोद भयाना हजकां के विधायक हैं। नारनौंद से इनेलो की सरोज मोर विधायक हैं। भजनलाल के बाद अब उनकी विरासत की बागडोर उनके बेटे कुलदीप बिश्नोई के हाथ में है।
हजकां-भाजपा का गठबंधन टूटने के बाद अब कुलदीप बिश्नोई अपने घोषणा पत्र के साथ चुनावी मैदान में हैं और हरियाणा जन चेतना पार्टी के साथ मिलकर नया इतिहास रचने की जुगत में लगे हैं। कुलदीप के ऊपर जहां अपने पिता की विरासत को बचाए रखने का दबाव है वहीं उन्हें भाजपा को भी आइना दिखाना है। इसी के चलते वे अपने क्षेत्र में स्थिति मजबूत करने के लिए किसी तरह की कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे।
दूसरी ओर क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने के लिए उन्हें कांग्रेस को भी घेरना है और यही वजह है कि उन्होंने विकास और भ्रष्टाचार को घोषणा पत्र में शामिल किया है। कांग्रेस अपनी वर्तमान पांच सीटों को बचाने के साथ ही क्षेत्र में और मजबूत होने की तैयारी में जुटी है। कांग्रेस प्रदेश में पिछले दस साल में किए गए विकास कार्यों को लेकर ही जनता के बीच है।
भाजपा और इनेलो ने भी हजकां और कांग्रेस को घेरने के लिए पूरी तैयारी कर रखी है। लोकसभा चुनाव में दुष्यंत सिंह चौटाला की जीत ने इनेलो को संजीवनी जो दी, उसका असर अभी तक है।