वह जान जोखिम में डाल कर कोविड को रोकने का काम कर रही हैं। हरियाणा की आशा कार्यकर्ता अपनी मांगों व समस्याओं के बारे आपको बार-बार अवगत करवाते रहे हैं। परंतु विभाग व सरकार की ओर से किसी प्रकार का समाधान नहीं हुआ। आशा कार्यकर्ताओं के अनुसार हरियाणा में दो हजार से ज्यादा आशा कार्यकर्ता सात अगस्त से हड़ताल पर हैं लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उनकी मांग का समाधान नहीं किया है।
ट्रैफिक को किया गया डायवर्ट
आशा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन को देखते हुए पंचकूला से चंडीगढ़ को जाने वाले ट्रैफिक को विकास नगर और मौली जागरां की ओर मोड़ दिया गया जबकि चंडीगढ़ से आने वालों को टैंक चैक को माध्यम से निकाला गया। हालात यह हो गए कि कुछ समय पंचकूला सेक्टर-16 के पास जाम जैसी स्थिति बन गई।
पुलिस के तंबू पर भी कर लिया कब्जा
आशा कार्यकर्ताओं को जब यहां बैठने के लिए जगह नहीं मिलीं तो वह पुलिस के तंबू के भीतर चली गईं। ऐसी स्थिति में यहां अजीब सी स्थिति उत्पन्न हो गई। आशा कार्यकर्ताओं ने यहां करीब पांच घंटे तक प्रदर्शन किया।
ये हैं आशा कार्यकर्ताओं की मांगें
- जनता को गुणवत्ता स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने हेतु सरकारी स्वास्थ्य के ढांचे को मजबूत किया जाए व एनएचएम को स्थार्यी किया जाए।
- आठ एक्टिविटी का काटा गया 50 प्रतिशत पैसा जो 2019 तक मिलता रहा था इसे तुरंत वापस लागू किया जाए।
- कोविड-19 में काम कर रही आशाओं को जोखिम भत्ते के तौर पर 4000 दिए जाएं। कोविड-19 के लिए केंद्र की ओर से दिए जा रहे 1000 प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत राज्य का हिस्सा दिया जाए।
- गंभीर रूप से बीमार एवं दुर्घटना के शिकार आशाओं को सरकार के पैनल अस्पतालों में इलाज की सुविधा दी जाए।
- आशाओं को समुदायिक स्तरीय स्थायी कर्मचारी बनाया जाए। जब तक पक्का कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक हरियाणा सरकार का न्यूनतम वेतन दिया जाए और इसे महंगाई भत्ते के साथ जोड़ा जाए। ईएसआई एवं पीएफ की भी सुविधा दी जाए।
- आशा कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य कर्मी का दर्जा दिया जाए।
- 21 जुलाई 2018 को जारी किए गए नोटिफिकेशन के सभी बचे हुए निर्णय को लागू किया जाए।