पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन ने एक नए संगठन का गठन कर लिया है हालांकि धवन का कहना है कि यह गैर राजनीतिक संगठन है, लेकिन राजनीति के बाजार में इसके कुछ और ही कयास लगाए जा रहे हैं।
धवन लोकसभा चुनाव के बाद से ही चुप बैठे थे, लेकिन एक दम से उन्होंने बुधवार को इस नए संगठन को लांच कर दिया है। धवन का भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन्र से छत्तीस का आंकड़ा है। पिछले लोकसभा चुनाव में धवन ने सांसद किरण खेर की जीत में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन उन्हें इसके बदले कोई इनाम नहीं मिला। वहीं धवन गुट के एक भी सदस्य को किसी भी प्रशासनिक कमेटी और पार्षद तक की टिकट नहीं दी गई।
धवन ने इस संगठन का गठन करके तीन साल की चुप्पी तोड़ी है। इस नए संगठन का नाम जन कल्याण मंच रखा गया है। जबकि भाजपा में आने से पहले धवन ने चंडीगढ़ विकास मंच का गठन किया था जो कि नगर निगम चुनाव भी लड़ता था, लेकिन भाजपा में आने के बाद उन्होंने इस मंच का विलय कर दिया था। हालांकि धवन ने इस नए संगठन का मुख्य उद्देश्य सुस्त प्रशासन और उसमें व्याप्त भष्ट्राचार के खिलाफ काम करना बताया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को साकार करने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाना भी है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री धवन का प्रदेश अध्यक्ष टंडन से है छत्तीस का आंकड़ा
पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन के साथ सांसद किरण खेर
- फोटो : File Photo
जारी प्रैस नोट के अनुसार मंच के गठन के दौरान उपस्थित सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 40 साल से लगातार सामाजिक कार्यों और शहर की समस्याओं के समाधान के लिए संघर्षशील रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन को इस सामाजिक मंच के संचालन के लिए अधिकृत किया गया है। धवन को यह भी अधिकार सौंपा गया है कि वह शहर के भिन्न-भिन्न गांवों, कॉलोनियों और सेक्टरों में भी मंच को संगठित करे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री व संगठन के संचालक हरमोहन धवन ने कहा कि देश में हुए पिछले कई चुनावों जैसे विधानसभा, चंडीगढ़ सहित देश के विभिन्न स्थानीय निकायों में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिलने के बाद लोगों की उम्मीदें भाजपा से और भी बढ़ गई है। ऐसे में हमें भी उम्मीद है कि चंडीगढ़ प्रशासन भी शहर की जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरेगा।
जिससे प्रधानमंत्री मोदी जी के सपने साकार हो सके। उनका कहना है कि पिछले तीन साल में सांसद और पार्टी ने कई काम करवाए हैं, लेकिन कुछ काम प्रशासन के अधिकारियों के कारण नहीं हुए, अब संगठन दबाव बनाकर वह काम करवाएगा।