अकाली पार्षद एवं पूर्व मेयर हरजिंदर कौर का नामांकन पत्र बुधवार को छंटनी के बाद खारिज कर दिया गया। ऐसे में अब कवरिंग कैंडिडेट बलविंदर कौर वार्ड नंबर-15 से चुनाव लड़ेंगी। हरजिंदर कौर 20 साल से लगातार पार्षद बनती आ रहीं थीं। अब उनकी नॉमिनेशन कैंसल होने पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि चुनाव हारने के डर से हरजिंदर कौर ने मैदान छोड़ दिया।
रिटर्निंग अधिकारी एसके जैन का कहना है कि हरजिंदर कौर ने जो नामांकन पत्र भरा था उसमें जो नाम को प्रस्ताव करने वाले 10 निवासी थे उनके हस्ताक्षर नहीं थे, जबकि कवरिंग कैंडिडेट बलविंदर कौर के नाम का प्रस्ताव करने वाले निवासियों के हस्ताक्षर थे।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
-हरजिंदर कौर ने अपना कवरिंग कैंडिडेट किसी अकाली कार्यकर्ता और स्थानीय समर्थक को बनाने की बजाए भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी की सचिव बलविंदर कौर को ही क्यों बनाया? बलविंदर उनके वार्ड की निवासी भी नहीं हैं। वह वार्ड नंबर-17 के सेक्टर-27 से हैं।
-हरजिंदर ने पहली बार नामांकन नहीं भरा। 4 बार वार्ड-15 से ही पार्षद बन चुकी हैं। ऐसे में नामांकन पत्र भरने में गलती कैसे हो गई?
-सेक्टर-18 की प्रेस बिल्डिंग में जहां पर नामांकन भरा जा रहा था, वहां पर रिटर्निंग अधिकारी से पहले दो अलग-अलग जगह डेस्क बने थे जहां पर अधिकारी गहनता से हर उम्मीदवार का नामांकन चेक कर रहे थे। गलती पर उसी समय जानकारी दे दी जाती थी, लेकिन क्या हरजिंदर के नामांकन के समय किसी ने खामी नहीं बताई?
-हरजिंदर कौर और कवरिंग कैंडिडेट बलविंदर कौर दोनों के शपथ पत्र सेक्टर-18 के ई संपर्क सेंटर से लिए गए और दोनों के दस्तावेज एक ही नोटरी ने सत्यापित करवाए गए, लेकिन क्या उस समय भी किसी का ध्यान इस पर नहीं गया कि प्रस्तावित करने वाले निवासियों के हस्ताक्षर हरजिंदर कौर के नामांकन में नहीं हैं?
कांग्रेस का आरोप, हरजिंदर कौर ने जानबूझकर छोड़ी थी खामी
हरजिंदर कौर का नामांकन खारिज
- फोटो : अमर उजाला
मनोनीत पार्षद संधू ने भी उठाया सवाल
वार्ड-15 में सेक्टर-34, 35 और 44 का एरिया शामिल है। इस वार्ड के निवासी मनोनीत पार्षद डीएस संधू ने भी हरजिंदर कौर के नामांकन खारिज होने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि दो दिन से एरिया में यह बात फैली हुई थी कि हार के डर से हरजिंदर कौर इस बार चुनाव से पीछे हट रही हैं और नामांकन खारिज करवा रही हैं।
युवा कांग्रेस अध्यक्ष हरमेल केसरी का आरोप है कि जानबूझकर नामांकन खारिज करवाया गया है। भाजपा और अकाली दल में पहले से डील हो गई थी। प्रशासन के अधिकारी भी इस साजिश में शामिल थे।
दो अकाली उम्मीदवार हैं भाजपा कार्यकर्ता
अकाली दल के लिए 4 सीटें छोड़ी गई थीं, लेकिन इन 4 सीटों पर अब जो दो उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। असल में वह भाजपा के कार्यकर्ता हैं। कवरिंग कैंडिडेट बलविंदर कौर भाजपा में प्रदेश सचिव के पद पर तैनात हैं। उनके पति भी भाजपा नेता हैं। हालांकि अब शिअद अध्यक्ष जगजीत सिंह कंग का कहना है कि अब बलविंदर कौर राणा अकाली उम्मीदवार हैं।
उधर वार्ड-5 से चुनाव लड़ रही अकाली उम्मीदवार मीना भी भाजपा कार्यकर्ता हैं। उनके पति कृष्ण कुमार भाजपा के पदाधिकारी हैं। सूत्रों का कहना है कि वार्ड-15 और 5 के भाजपा कार्यकर्ताओं ने लगातार अध्यक्ष संजय टंडन पर यह सीट शिअद से लेने का दबाव बनाया हुआ था। इसके बाद टंडन के प्रयास से ही यह रास्ता निकाला गया।
वार्ड-17 से दावेदार थीं बलविंदर कौर
भाजपा में टिकट वितरण से पहले बलविंदर कौर वार्ड-17 से दावेदार थीं। पार्टी नेताओं ने वार्ड महिला के लिए रिजर्व होने के कारण चुनाव की तैयारी का भी इशारा कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद आशा जसवाल को यहां से टिकट दे दिया गया। इसके बाद से बलविंदर कौर और उनके पति रूपिंदर सिंह भाजपा के सीनियर नेताओं से नाराज हो गए थे।