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हंसराज ने डेरा बापू लाल बादशाह से संबंध तोड़े

Wed, 28 May 2014 09:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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अंतरराष्ट्रीय सूफी गायक हंसराज हंस ने नकोदर स्थित बापू अलमस्त लाल बादशाह से सीधे तौर पर अपने संबंध तोड़ लिए हैं, वे डेरे में मौजूदा गद्दीनशीन संत हैं। हंसराज हंस ने इसका अधिकारिक रूप से ऐलान बुधवार को जालंधर में प्रेसवार्ता में किया और कहा कि अब उनकी जिंदगी का आगे का सफर गांव गोहीरां में डेरापंज पीर में रहेगा। वहां पर वे सूफी सेंटर का निर्माण करवा रहे हैं। वहीं पर वे सूफी गायकी की तालीम आने वाली पीढ़ी को देंगे।
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बापू अलमस्त लाल बादशाह देश का प्रसिद्ध स्थान है, जिसके प्रति देश व विदेशों में बसे लोगों के मन में काफी आस्था है। इस डेरे की गद्दी छह साल पहले हंसराज हंस को सौंपी गई थी। डेरे के गद्दीनशीन संत बनने के बाद गायक हंसराज हंस ने इसके विकास को लेकर दिन रात एक कर दिया और इसमें काफी कुछ बदलाव व अत्याधुनिक ढंग से तैयार करवाया। मिली जानकारी के मुताबिक कुछ समय से डेरे में आपसी खटास चल रही थी। डेरे में जो अत्याधुनिक शेड का निर्माण किया गया है, उसको लेकर कई तरह की बातें उठाई जा रही थी।

हंसराज हंस ने बुधवार को प्रेस वार्ता में इस बात से इंकार किया कि डेरा बापू लाल बादशाह में शेड निर्माण को लेकर किसी तरह का विवाद है। हां, इतना जरूर खुलासा किया कि वे डिप्टी सीएम सुखबीर बादल के आह्वान पर एक माह के लिए हरसिमरत कौर बादल के प्रचार के लिए चले गए थे।
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पीछे से डेरे की चारदीवारी के भीतर ही कई दुकानें अवैध रूप से तैयार कर दी गईं, जिसको उन्होंने विरोध किया। हंसराज हंस ने कहा कि वे डेरे की गद्दी पर हैं और एक सेवादार की तरह बने रहेंगे लेकिन वे वहां पर विकास, पैसे के खर्च में भी दखलंदाजी नहीं करेंगे। ये सब कुछ डेरा बापू लाल बादशाह की प्रबंधक कमेटी ही करेगी।

हंस ने कहा कि वे डेरे में होने वाले विकास कार्यों के लिए कमेटी के साथ खड़े हैं। उनकी लंबे समय से तमन्ना थी कि वे किसी सुनसान स्थान पर जाकर अपनी रूह की खुराक सूफी गायकी को फैलाएं और गांव गोहीरां में डेरा पंजपीर में उनको वह स्थान मिल गया है, जिसकी उनको तलाश थी। वहां पर सूफी सेंटर का निर्माण कर उनका सपना साकार हो गया है।

नशे के खिलाफ चल रही है जंग
हंसराज हंस ने कहा कि उनकी नशे के खिलाफ जंग चल रही है। उनका अगला प्रोग्राम है कि वे सूफी सेंटर से एक मोबाइल वैन चलाएं, जो नशे के खिलाफ प्रचार करे। नशे के खिलाफ उनका प्रयास युद्धस्तर पर होगा।

दर्द तो मेरे सीने में भी है
हंस ने हरसिमरत कौर को मंत्रिमंडल में शामिल होने पर मुबारकबाद दी और कहा कि उन्होंने शिअद की तरफ से एक माह बठिंडा में रहकर उनके के लिए प्रचार किया है। टीनू की हार पर हंस ने कहा कि हार व जीत पर वे कुछ नहीं बोलेंगे लेकिन 2009 में उनकी लोकसभा में हार का दर्द तो सीने में है, हार का दर्द कैसा होता है इसका एहसास होना चाहिए। मैं 2009 में हार के बाद किस तरह से डिप्रेशन से बाहर निकला हूं, यह मुझे ही पता है।
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