हैफेड के चेयरमैन सुभाष चंद्र कत्याल ने सीआईआई की इनोवेटिव फार्मर्स मीट में पौधरोपण और तालाबों के जीर्णोद्धार पर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में पौधरोपण और तालाबों का जीर्णोद्धार फाइलों में ही हो रहा है। जमीन पर उतने पौधे लगते ही नहीं, जितने कागजों में दिखाए जाते हैं। जिससे प्रदेश का ग्रीन कवर उतना नहीं बढ़ पाया, जितना होना चाहिए था।
प्रदेश के तालाबों को सहेजने में भी ऐसा ही हो रहा है। अधिकांश तालाबों पर अवैध कब्जे हैं, कुछ ही तालाब नए बने हैं और बन रहे हैं। बाकि का जीर्णोद्धार फाइलों में ही चल रहा है। कत्याल ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल तो ईमानदार हैं, लेकिन कर्मचारियों से लेकर मंत्रियों तक में लूट की होड़ मची हुई है। हर कोई अधिक से अधिक धन जुटाने में लगा है।
पलवल निवासी पूर्व विधायक कत्याल ने बताया कि चालीस साल से वह राजनीति में हैं, एक ही बार विधायक बने, दोबारा मौका नहीं मिला। बावजूद इसके कि वह किसी की मदद से पीछे नहीं हटते, जनता में उनकी छवि भी अच्छी है। लेकिन, अब पैसे वालों का बोलबाला हो गया है।
यूरोपीय देश दस- दस साल युद्ध लड़कर भी रहे जीवित
बकौल सुभाष चंद्र, यूरोपीय देश दस-दस साल युद्ध लड़कर भी जीवित रहे। चूंकि, उनके शासक बिके नहीं। हिंदुस्तान को आजादी से पहले कई बार बाहरी ताकतों ने परास्त किया। इसका बड़ा कारण उस समय के शासकों का राष्ट्रहित के बजाय पैसे को तवज्जो देना रहा।
योजनाओं को धरातल पर लाने में अधिकारी-कर्मचारी अड़चन
कत्याल ने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जल संचयन सहित अनेक अच्छी योजनाएं लागू की हैं, लेकिन धरातल पर उन्हें तेजी से लागू करने में अधिकारियों और कर्मचारियों का लापरवाह रवैया अड़चन बना रहा। कत्याल के अनुसार भू-जल स्तर ऊपर लाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ ही तालाबों का निर्माण करना होगा। जल संचयन से ही भू-जल स्तर ऊपर आएगा।
पानी बचाने के लिए नकदी फसलों की ओर मुड़ें : कत्याल
हैफेड चेयरमैन सुभाष कत्याल ने किसानों को सलाह दी कि वे पानी बचाने के लिए परंपरागत खेती छोड़कर नगदी फसलों की ओर मुड़ें। धान के बजाए अन्य फसलों को तरजीह दी जाए। साथ ही फसलों में कम से कम कीटनाशकों और रसायनिक खाद का इस्तेमाल करें। चूंकि, बेतहाशा इस्तेमाल से भू-जल प्रदूषित हो रहा है।
जिससे अब हृदय घात के बजाए हार्ट फेल होना शुरू हो गए हैं। उन्होंने सीआईआई से तालाबों के जीर्णोद्धार और नदियों की सफाई के लिए आगे आने को कहा। साथ ही किसानों को जल संरक्षण व आधुनिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए शिविर लगाने का सुझाव दिया।