डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की MSG को पंजाब में बैन करने के पीछे का सच जान चौंक जाएंगे आप। पंजाब में एमएसजी की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध में खुफिया रिपोर्टों का अहम योगदान रहा।
काफी समय से पंजाब पुलिस के खुफिया तंत्र की ड्यूटी प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इस फिल्म को लेकर लोगों की भावनाओं का पता लगाने के लिए लगी हुई थी।
इन रिपोर्टों में यही बात सामने आई कि फिल्म रिलीज होने से प्रदेश के हालात काफी भयानक रूप अख्तियार कर सकते हैं। जहां डेरा सच्चा सौदा विरोधी वर्ग फिल्म के खिलाफ आक्रामक होकर हिंसा में संलिप्त हो सकता है, वहीं इसके समथर्कों की जवाबी कार्रवाई काफी घातक साबित हो सकती है।
रिपोर्ट में पंजाब में हालात बिगड़ने की आशंका
रिपोर्ट में फिल्म के रिलीज होने से प्रदेश के कई हिस्सों में हालात के नाजुक होने की आशंका जाहिर की गई थी। इस कड़ी में वर्ष 2007 के सलाबतपुरा प्रकरण और लुधियाना के शिंगार सिनेमा बम ब्लास्ट को भी जोड़ा गया।
2007 में सलाबतपुरा में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की ओर से जाम-ए-इंसां पिलाए जाने के वक्त पहनी गई पोशाक को लेकर खासा बवाल हुआ था।
आरोप था कि ऐसा करते हुए डेरा प्रमुख ने सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह की नकल की। इसके बाद पंजाब कई दिन हिंसा की आग में झुलसता रहा।
हालांकि, बाद में पुलिस पूछताछ के दौरान डेरा प्रमुख ने कहा कि उन्होंने वही पोशाक पहनी जो उनके अनुयायियों ने लाकर दी। ऐसा करते हुए उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी की नकल नहीं की। इसके बावजूद अभी तक उस प्रकरण की चिंगारी लगातार सुलग रही है।
शिंगार कांड को झेल चुका हैं पंजाब
गुरमीत राम रहीम के कारण ही अक्तूबर 2007 में लुधियाना के शिंगार सिनेमा में बम ब्लास्ट हुआ, जिसमें छह लोगों की मौत के अलावा कई लोग घायल हो गए थे।
इसके बाद हुए खुलासे में यह बात सामने आई कि धमाके को अंजाम देने वालों के निशाने पर डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम थे। पुलिस का कहना था कि धमाके को अंजाम देने वाले बब्बर खालसा इंटनेशनल से संबद्ध थे और गुरमीत राम रहीम उनकी हिट लिस्ट पर थे।
रिपोर्टों में आशंका व्यक्त की गई कि फिल्म के रिलीज से असामाजिक तत्व भी गलत फायदा उठाकर अप्रिय घटना को अंजाम दे सकते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार ने डेरा प्रमुख की इस फिल्म पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।