ईडी के सहायक निदेशक निरंजन सिंह को कोलकाता ट्रांसफर किए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। वे पंजाब के कैबिनेट मंत्री बिक्रम मजीठिया व अन्य अकाली नेताओं के खिलाफ ड्रग्स तस्करी मामले में जांच कर रहे थे।
कांग्रेस ने इसे जांच को प्रभावित करने और शिअद व भाजपा के बीच हुई डील करार दिया। कांग्रेस में मामले की जांच पंजाब से बाहर सीबीआई, सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट के सिटिंग जज से करवाने की मांग की है।
पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप बाजवा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। वहीं, पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चौ. सुनील जाखड़ और पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत बादल ने तबादले की आलोचना की है।
जांच को भटकाने की कोशिश : बाजवा
पीपीसीसी अध्यक्ष प्रताप बाजवा ने कहा है कि यह जांच को भटकाने की कोशिश है। सत्ताधारियों ने नारको टैरोरिज्म रैकेट को दबाने की आपराधिक साजिश की है, क्योंकि मजीठिया ताकतवर नेताओं में से एक हैं।
ईडी वित्त मंत्री अरुण जेतली के अधीन आती है और इस तबादले ने साबित कर दिया है कि केंद्र सरकार जांच को किस तरह से प्रभावित कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में बाजवा ने कहा कि ऐसे गंभीर हालात में पंजाब के भविष्य के मद्देनजर रैकेट की सीबीआई जांच जरूरी है, जिससे दोनों अकाली दल व भाजपा खेल रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री के पद पर समझौता : जाखड़
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि भाजपा का इस मसले पर एकदम से स्टैंड बदलना स्पष्ट करता है कि दोनों पार्टियों के बीच इस मसले पर समझौता हो गया है।
इसकी भनक उसी दिन लग गई थी, जब माघी मेले पर पहुंचे पंजाब भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा की मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने तारीफ की थी। इससे पहले कमल शर्मा लगातार मजीठिया के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
जाखड़ ने आरोप लगाया कि भाजपा ने पंजाब का उप मुख्यमंत्री पद हासिल करने केलिए इस मसले पर यू-टर्न लेते हुए मुख्य ईडी अधिकारी को बदला है। इसका खुलासा दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हो जाएगा।
जांच को ठप करने की साजिश: मनप्रीत
पीपीपी अध्यक्ष मनप्रीत सिंह बादल ने कहा है कि ईडी अधिकारी का तबादला मामले की जांच को ठप करने की साजिश है। यह सियासी दबाव का नतीजा है। भाजपा ने शिअद नेताओं को फायदा पहुंचाने और अपने लिए पंजाब सरकार में बढ़िया पद हासिल करने के लिए यह कार्रवाई की है।