उन्होंने कहा कि एक संवत में चार नवरात्र होते हैं। इनमें चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नौ दिनों का नवरात्र होता है। चैत्र का नवरात्र बासंतिक और आश्विन का नवरात्र शारदीय नवरात्र कहलाता है। आषाढ़ और माघ का नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाता है। इसमें आदि शक्ति भगवती दुर्गा की विशेष आराधना और पूजा की जाती है। आषाढ़ और माघ के गुप्त नवरात्र में तंत्र-मंत्र और विशेषकर 10 महा विद्याओं की साधना की जाती है। खासकर महाकाली की।
कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
गुप्त नवरात्र पर कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय 7 बजकर 19 मिनट से लेकर सुबह दस बजे तक है। इसके बाद समय मध्यम है।
देवी व्रत या काली पूजन में कुमारी पूजन
पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि देवी व्रत या काली पूजन में कुमारी पूजन परम आवश्यक माना गया है। उन्होंने कहा कि सामर्थ्य हो तो पूरे नवरात्र में प्रतिदिन कुमारी पूजन करें। अन्यथा समाप्ति के दिन नौ कुमारी कन्याओं के चरण धोकर देवी रूप मानकर गंध पुष्प आदि से पूजन कर भोजन कराएं।
कन्या पूजन का महत्व
कुमारी या कन्या पूजन का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। उन्हाेंने कहा कि एक कन्या के पूजन से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। दो कन्याओं के पूजन से भोग और मोक्ष, तीन से धर्म, अर्थ और काम की प्राप्ति होती है। चार कुमारियों के पूजन से राज पद, पांच कन्याओं के पूजन से विद्या प्राप्ति, छह कन्याओं के पूजन से सठकर्म, सात कन्या के पूजन से राज्य की प्राप्ति, आठ कन्याओं के पूजन से संपदा की प्राप्ति और नौ कन्याओं के पूजन से पृृथ्वी की प्राप्ति होता है।