सूरज के साथ पुलिस ने की बर्बरता
राजू की गवाही इस केस में बेहद अहम थी। वह कोटखाई तहसील के गांव हलाइला का रहने वाला था। राजू बाग में अकाउंटेंट का काम करता था। शिमला के चर्चित गुड़िया दुष्कर्म-हत्या मामले में पुलिस ने राजू समेत छह युवकों को हिरासत में लिया था। 14 जुलाई 2017 को पांचों को पुलिसकर्मियों ने ठियोग कोर्ट में पेश कर सात दिनों का रिमांड लिया। उन्हें कोटखाई थाने ले जाया गया। वहां एसएचओ राजिंदर सिंह, हेड कांस्टेबल मोहन लाल, सूरत सिंह, रफी मोहम्मद और रंजीत स्टेटा उन्हें रोजाना बुरी तरह पीटा। रंजीत ने उसके मुंह पर घूंसे मारे। उसे एक टांग पर खड़ा रखा और बैठने नहीं दिया जाता था। उसे डंडों और बिच्छू बूटी से पीटा गया।
सूरज बार-बार कहता रहा मैंने कुछ नहीं किया
18 जुलाई 2017 की शाम को जब सूरज को खाना दिया तो उसे काफी भूख लगी थी और उसने एक अतिरिक्त रोटी मांगी। उसे रोटी तो नहीं दी गई, पुलिसकर्मी उसे थाने की पहली मंजिल पर ले गए। वहां उसे करीब 40-45 मिनट बुरी तरट पीटा गया। उसकी चीखें नीचे तक सुनाई दे रही थी। वह बार-बार यही कह रहा था कि उसने कुछ नहीं किया। उसके दो बच्चे हैं और उसे घर जाने दिया जाए, लेकिन पुलिसकर्मी सुनने को तैयार नहीं थे। कुछ देर बाद सूरज की चीखें सुनाई देनी बंद हो गई, लेकिन पुलिसकर्मी फिर भी उसे पीटते रहे। कुछ देर बाद पुलिसकर्मी नीचे आए और फिर राजू और सुभाष को ऊपर की मंजिल पर ले गए। वहां उन दोनों को करीब आधा घंटा बुरी तरह पीटा गया। इस दौरान सुभाष भी को दो-तीन बार बेसुध हो गया था।
ये था मामला
जुलाई 2017 को शिमला के पास कोटखाई गांव में एक बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने छह युवकों आशीष चौहान, राजू, सुभाष, सूरज, लोकजन उर्फ छोटू और दीपक को हिरासत में लेकर पीटा। इस दौरान पुलिस लाकअप में सूरज की मौत हो गई थी। इस मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और सीबीआइ को जांच सौंप दी। सीबीआइ जांच में पता चला कि पुलिस ने केस निपटाने के लिए निर्दोष युवकों को बुरी तरह टार्चर किया।
आठ पुलिसकर्मियों को हुई उम्रकैद
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस मामले का ट्रायल चंडीगढ़ सीबीआइ कोर्ट में चला जहां सोमवार को हिमाचल प्रदेश के आइजी जहूर हैदर जैदी, ठियोग के तत्कालीन डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई पुलिस थाने के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआइ दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजीत स्टेटा को उम्रकैद की सजा सुना दी गई। इस मामले में तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।