जब 'गुड्डन' को पता चला कि पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में अब लड़कियों के हॉस्टल 24 घंटे के लिए खुलेंगे, तो वे बहुत खुश हुई। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। कहती हैं कि वर्ष 2016 में उन्होंने इस यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया था। उस दौरान जब वह लाइब्रेरी में पढ़ने जाती थी तो हॉस्टल के बंद होने के समय से डर लगता था और इस कारण भागते-भागते हॉस्टल पहुंचते थे। फाइन का भी डर होता था लेकिन यहां की संघर्षशील छात्राओं ने जो आंदोलन चलाया यह अपने में नजीर बनेगा। भेदभाव यदि किया जाता है तो उसमें सभी को एकजुट होना चाहिए। मीडिया की जो भूमिका होती है वह अमर उजाला ने इस आंदोलन में निभाई। वह भी काबिले तारीफ है।
एक्ट्रेस कनिका मान कहती हैं कि आजादी के लिए पीयू में 2015 में आवाज उठी थी लेकिन उसे दबा दिया गया। वह इसलिए कि आंदोलन करने वाले भी मजबूत नहीं थे। छात्राओं के हक में बहुत कम लोग खड़े थे। अब मजबूत छात्राओं को नेतृत्व मिला तो संघर्ष लंबा चला। छात्राओं ने बहादुरी का परिचय देते हुए आजादी पाई है, यह पूरे देश में नजीर बनेगी। उन्होंने पीयू की छात्राओं को संदेश दिया है कि जब भी उन्हें साथ अन्याय हो तो उसके खिलाफ आवाज जरूर उठाएं। उन्होंने मीटू पर भी कहा कि इसके कई केस सामने आए लेकिन जब तक कार्रवाई न हो तब तक कुछ फायदा नहीं। दो से तीन दिन तक बस चर्चा जरूर रहती है।