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GST का सबसे ज्यादा असर इस इंडस्ट्री पर पड़ा है, 70 प्रतिशत प्रोडक्शन ठप

Mon, 17 Jul 2017 12:56 PM IST
रमिंदर सिंह/अमर उजाला, अम्बाला कैंट
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जब से जीएसटी लागू हुआ है, तब से देश की एक इंडस्ट्री ठप होने की कगार पर पहुंच गई है। इसे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, देखिए रिपोर्ट। नित नई तकनीक से दो चार होने वाला अंबाला का साइंस उद्योग जीएसटी के गणित के आगे बेबस हो गया है।
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यहां करीब हजार तरह के अलग-अलग साइंस उपकरणों का निर्माण होता है मगर आजकल सभी इकाइयों में उत्पादन एक तिहाई भी नहीं रह गया है। न नए आर्डर हैं और न ही वर्करों के लिए काम। जुलाई में ही स्कूल खुलते हैं और यही वह समय है, जब साइंस इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा आर्डर मिलते हैं मगर इस बार जीएसटी की वजह से सन्नाटा है।

टेढ़ा हुआ टैक्स का गणित

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पूरी साइंस इंडस्ट्री इस उलझन में उलझी है कि किस उपकरण पर कौन सा एचएसएन (हार्मोनाईस्ड सिस्टम ऑफ नॉमेनक्लेचर) कोड  लगेगा और उस पर कितना टैक्स होगा। सरकार ने अलग-अलग उपकरणों को जीएसटी दरों के अलग-अलग स्लैब में रखा है। माइक्र्तोस्कोप पर यदि जीएसटी 28 प्रतिशत है तो उसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले ब्रास पर 18 फीसदी और लेंस पर 28 प्रतिशत। इतना ही नहीं किस उपकरण पर कौन सा एचएसएन कोड लगेगा, इसकी जानकारी जुटाने में ही उनके पसीने छूट रहे हैं। एचएसएन कोड लगने के बाद ही उपकरण पर जीएसटी तय होगी। इसके बाद ही उद्यमी बाजार में उपकरण का दाम तय कर उसे बेच पाएंगे। 

70 फीसदी का फटका
उद्यमी मानते हैं कि पिछले 15 दिन में उत्पादन में 70 फीसदी की कमी आ चुकी है। जीएसटी आने के बाद मार्केट तेजी से नीचे जा रही है। ऑर्डर तो दूर खरीददारों की ओर से इंक्वायरी तक नहीं आ रही। असमंजस की स्थिति ऐसे है कि उद्यमी यही नहीं बता पा रहे हैं कि साइंस उपकरण का जीएसटी लगने के बाद मूल्य कितना होगा। सरकार से उन्हें कोई गाइडेंस और मदद नहीं मिल रही। नई व्यवस्था के तहत बिलिंग करने के लिए हर उपकरण के एचएसएन कोड फीड करने हैं। उपकरणों की संख्या एक हजार से ज्यादा है, ऐसे में इतने कोड फीड करने और हिसाब किताब के लिए अलग से व्यवस्था पर खर्च करना पड़ रहा है।  

क्या है एचएसएन कोड
जीएसटी व्यवस्था के तहत बेची जा रही हर वस्तु के सही वर्गीकरण और उनपर लागू होने वाली टेक्स की दर को निश्चित करने के लिए एचएसएन कोड बनाए गए है। टेक्स रेट के विवाद से बचने के लिए विभिन्न वस्तुओं के तीन हजार से ज्यादा कोड बनाये गए हैं। मसलन, साइकल पर टेक्स की दर यदि 5 फीसदी है और इसके कलपुर्जो पर यह दर 12 फीसदी हो सकती है। इसलिए जब कोई व्यापारी साइकल बेचता है तो उसका एचएसएन कोड अलग होगा और जब वह साइकल के पार्ट्स बेचेगा तो उसका कोड अलग होगा।
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असमंजस में उद्यमी

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सरकार ने कहा है कि यदि डेढ़ करोड़ तक टर्न ओवर नहीं है तो बिल में एचएसएन कोड देने की जरूरत नहीं है, मगर जिस पार्टी को बिल देना है उसकी टर्न ओवर ज्यादा है तो ऐसे में कोड लिखना पड़ रहा है। इन कोड के फेर में पूरी साइंस इंडस्ट्री उलझी है। बात केवल एक उत्पाद की हो तो कोई दिक्कत नहीं, मगर यहां साइंस के हजारों उपकरण बन रहे हैं। कारोबार 70 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है और बाजार नीचे आ गया है।
- एपी बंसल, अध्यक्ष, साइंटिफिक अप्रेंट्स मेन्यूफेक्चरर एंड एक्सपोटर एसोसिएशन, अंबाला।

जून-जुलाई में स्कूल व कालेज खुल जाते हैं। नए सत्र के लिए साइंस उपकरणों की खरीद ज्यादा होती है, मगर इस सत्र में आर्डर ही नहीं मिल रहे। जीएसटी व एचएसएन कोड के कारण उत्पादन भी लगभग ठप है। इंडस्ट्री समस्या झेल रही है।
- कमलजीत सिंह, माइक्र्तोस्कोप निर्माता।
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